वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा जगत में मानवीय संबंधों पर मंथन जरूरी: देवयानी मुनगली

नैनीताल, 16 फ़रवरी । कुमाऊँ विश्वविद्यालय के चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा विभाग में सोमवार को संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल, पुणे (महाराष्ट्र) की संस्थापक एवं निदेशक, मूल रूप से अल्मोड़ा निवासी एवं कुमाऊँ विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा देवयानी मुनगली ने प्रशिक्षु शिक्षकों को संबोधित करते हुए वर्तमान शिक्षा परिदृश्य में मानवीय संबंधों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि श्रीमती मुनगली, कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीएस रावत, संकायाध्यक्ष प्रो. अतुल जोशी एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक उप्रेती ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। आगे अपने संबोधन में श्रीमती मुनगली ने कहा कि तकनीक के तीव्र विकास के दौर में शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच मानवीय संबंधों को मजबूत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षक को नाविक की उपमा देते हुए कहा कि वह बदलते सामाजिक परिवेश में विद्यार्थियों को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने भावी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति से जुड़े रहें तथा आधुनिक तकनीक के दास बनने के बजाय उसे विकास का साधन बनाएं।

उल्लेखनीय है कि श्रीमती मुनगली 13 पुस्तकों की लेखिका हैं, जिनमें से कई उत्तराखंड के विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल हैं। उन्हें उत्तराखंड स्टेट लिटरेचर अवॉर्ड सहित इंडियन एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड, प्रो. इंदिरा पारिख एजुकेशन लीडर्स साइटेशन और टाइम्स ऑफ इंडिया पावर विमेन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने महाराष्ट्र में संचालित संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा और चुनौतियों को भी साझा किया।

संबोधन के पश्चात संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रशिक्षु शिक्षकों ने शिक्षण-अधिगम से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। श्रीमती मुनगली ने वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से उनके समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने प्रशिक्षुओं को संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल, पुणे में शैक्षिक भ्रमण एवं इंटर्नशिप हेतु आमंत्रित भी किया। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक उप्रेती ने धन्यवाद ज्ञापन किया।