मप्रः केला उत्पादन तकनीक और निर्यात पर कार्यशाला सह कृषि संवाद आज बड़वानी में

भोपाल, 17 फरवरी । मध्य प्रदेश के बड़वानी में जिला प्रशासन एवं उद्यानिकी विभाग के तत्वावधान में आज मंगलवार को कृषि विज्ञान केन्द्र, तलून में एक दिवसीय सेमिनार सह कार्यशाला कृषि संवाद का आयोजन किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम एकीकृत बागवानी विकास मिशन और पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। जिसका मुख्य केंद्र केला उत्पादन की उन्नत तकनीक एवं निर्यात है। साथ ही मिर्च, डॉलर चना और क्षेत्र की एक्सोटिक फसलों के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी।

जनसम्पर्क अधिकारी प्रियंका रानी ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य जिले के किसानों को केले की खेती में आधुनिक तकनीकों, टिश्यू कल्चर के लाभ, कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के तरीकों और अंतरराष्ट्रीय बाजार (एक्सपोर्ट) की बारीकियों से अवगत कराना है। कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 900 से 1000 किसान शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें शामिल होने वाले प्रत्येक कृषक को विभाग द्वारा एक विशेष बुकलेट (मार्गदर्शिका) प्रदान की जाएगी। बुकलेट में केला व अन्य प्रमुख फसलों का संपूर्ण जीवन चक्र, खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक परेशानियाँ और उनके समाधान,एक्सपोर्ट (निर्यात) की संभावनाएँ और अंतर्राष्ट्रीय मानक विषयों का विस्तृत संकलन किया गया है, जिससे किसान कार्यशाला के बाद भी इसे एक संदर्भ के रूप में उपयोग कर सकें।

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, कृषि संवाद कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को कृषि के क्षेत्र में मार्गदर्शन दिया जाएगा। इस क्रम में जैन इरीगेशन जलगांव के अंर्तराष्ट्रीय केला विशेषज्ञ केबी पाटिल, एग्रोनॉमिस्ट अजहर जैदी, जैन कृषि तीर्थ जलगांव के डॉ. सुधीर भोंगले द्वारा टिश्यू कल्चर तकनीक पर, मुंबई एवं बुरहानपुर के केला एक्सपोर्टर शाहिद अली, अमोल महाजन, विकास अग्रवाल द्वारा केला एक्सपोर्ट, टेरा ग्लैब खरगोन के सीईओ संजय पाटीदार, वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्रसिंह, डॉ. आरपी शर्मा, रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. व्हाय के जैन, अवार्ड टू बनाना फॉर्मर ऑफ इंडिया संतोष लछेटा द्वारा केला उत्पादन तकनीक एवं जिले के प्रगतिशील किसान जयदेव पाटीदार, बलराम जाट और कृषि विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया जाएगा। साथ ही इस कार्यक्रम में एपिडा जैसे राज्य स्तरीय संस्थाओं के भी शामिल होने की संभावना है।

क्षेत्र के प्रमुख केला निर्यातकों जैसे राजेश्वरी केला ग्रुप, श्री सांई केला ग्रुप आदि की सूची और निर्यात के मानकों की जानकारी भी साझा करेंगे, जिससे किसान अपनी फसल को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार कर सकेंगे।