भ्रष्टाचार के अंतर्राष्ट्रीय सूचकांक में नेपाल की स्थिति में कोई सुधार नहीं

काठमांडू, 11 फ़रवरी । अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार सूचकांक में नेपाल विश्व में 182 देशों में दो पायदान नीचे खिसक कर 109 वें स्थान पर पहुंच गया है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के नेपाल चैप्टर द्वारा बुधवार जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में व्याप्त भ्रष्टाचार की स्थिति का मूल्यांकन कर जारी किए गए भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआई) वर्ष 2025 में नेपाल का स्कोर पिछले वर्ष की तरह ही स्थिर रहा है, हालांकि वैश्विक रैंकिंग में वह दो पायदान नीचे खिसक गया है। नेपाल का सीपीआई स्कोर 34 है और उसकी रैंकिंग 109वें स्थान पर पहुंच गई है। इससे पहले 2024 में भी नेपाल का स्कोर 34 ही था, लेकिन रैंकिंग 107वें स्थान पर थी। वर्ष 2024 में 180 देशों की तुलना में नेपाल 107वें स्थान पर था, जबकि 2025 में 182 देशों की सूची में वह 109वें स्थान पर आ गया है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने विभिन्न क्षेत्रों को समेटते हुए छह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के आधार पर औसत सीपीआई स्कोर तैयार किया है। ट्रांसपेरेंसी के अनुसार, इन संस्थानों द्वारा अगस्त 2025 तक के सुशासन से जुड़े आंकड़ों को आधार बनाकर नेपाल का स्कोर निर्धारित किया गया है।

दुनिया भर के 182 देशों के भ्रष्टाचार धारणा सर्वेक्षण के आधार पर ट्रांसपेरेंसी ने वर्ष 2025 के लिए औसत स्कोर 42 तय किया है। औसत से कम स्कोर प्राप्त करने वाले देशों को तुलनात्मक रूप से अधिक भ्रष्ट माना जाता है। नेपाल का स्कोर औसत से आठ अंक कम है। रिपोर्ट में ट्रांसपेरेंसी ने यह भी संकेत किया है कि सरकार भ्रष्टाचार नियंत्रण में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाई है।

नेपाल के संदर्भ में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने कहा है, “लंबे समय से नेपाल का स्कोर 35 से नीचे बना हुआ है। सूचकांक के निचले स्तर पर बना यह स्कोर इस बात को दर्शाता है कि नेपाल में बार-बार सत्ता में रही सरकारें भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाने में असफल रही हैं।”

टीआई नेपाल के अध्यक्ष मदनकृष्ण शर्मा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “नेपाल के संदर्भ में किसी भी प्रकार का सुधार नजर नहीं आता। एक-दो अंकों के उतार-चढ़ाव को सुधार नहीं माना जा सकता।”

शर्मा के अनुसार, नेपाल में भ्रष्टाचार बढ़ने और सुशासन की स्थिति बिगड़ने का मुख्य कारण राजनीतिक नेतृत्व में आई गिरावट है। उनका कहना है कि राजनीतिक ईमानदारी, आर्थिक लेनदेन की पारदर्शिता और जवाबदेही में लगातार कमी आई है। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार बढ़ने का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। सुधार की सख्त जरूरत है।”