शिमला, 04 फ़रवरी । जनजातीय कार्य मंत्रालय देशभर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) को बेहतर बनाने के लिए कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर साझेदारी का लगातार विस्तार कर रहा है। यह जानकारी जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश से सांसद डॉक्टर सिकंदर कुमार के सवाल के जवाब में राज्यसभा में दी।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से जनजातीय लोगों और क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सीएसआर आधारित योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
इससे पहले सांसद एवं प्रदेश महामंत्री डाॅ. सिकंदर कुमार ने हाल ही में 11 राज्यों के 144 एकलव्य विद्यालयों को शामिल करने वाले ओएनजीसी के समझौता ज्ञापन का हवाला देते हुए शेष 499 कार्यशील ईएमआरएस को वर्ष 2026 के अंत तक इसी तरह के सीएसआर-वित्तपोषित अवसंरचना मॉडल में शामिल करने की कार्ययोजना के बारे में सवाल किया। उन्होंने यह भी पूछा कि इन पहलों से जनजातीय छात्रों की उच्च शिक्षा और रोजगार में भागीदारी कैसे बढ़ेगी।
इसके जवाब में दुर्गादास उइके ने बताया कि एनएसटीएफडीसी ने पहले ही कोल इंडिया लिमिटेड, नॉर्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड, तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियों के साथ कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के तहत ईएमआरएस में अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं की स्थापना, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, तथा छात्रों और शिक्षकों दोनों के क्षमता निर्माण जैसी पहलें की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि एनएसटीएफडीसी और राष्ट्रीय एकलव्य विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से लागू की जा रही ये सीएसआर समर्थित योजनाएं पूरी तरह परिणाम उन्मुख हैं और इन्हें उच्च शिक्षा व रोजगार के लक्ष्यों के साथ जोड़ा गया है। इन उपायों का मकसद ईएमआरएस में शैक्षणिक आधार को मजबूत करना, डिजिटल क्षमताओं का विकास करना और छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है, ताकि वे आगे चलकर प्रमुख उच्चतर शिक्षा संस्थानों और व्यावसायिक क्षेत्रों में बेहतर अवसर हासिल कर सकें।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि इन पहलों की निगरानी एनईएसटीएस द्वारा की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सीएसआर उपाय वास्तव में जनजातीय छात्रों के लिए उच्च नियोजन दर और स्थायी रोजगार के अवसरों में बदल सकें। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल मंत्रालय में अलग से सीएसआर-ईएमआरएस प्रकोष्ठ स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि मंत्रालय की सीएसआर-वित्तपोषित परियोजनाओं के लिए एनएसटीएफडीसी पहले से ही कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में काम कर रहा है।