आईजीएमसी में ठेका कर्मचारियों की हड़ताल से सामान्य सेवाएं प्रभावित, आपातकालीन और ऑपरेशन सेवाएं रहीं जारी

शिमला, 12 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में गुरुवार को 24 घंटे की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर देखने को मिला। आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर करीब 600 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इन कर्मचारियों ने केवल आपातकालीन सेवाएं जारी रखीं, जबकि अन्य सामान्य सेवाओं में बाधा आई।

हड़ताल के चलते अस्पताल में सफाई व्यवस्था, पर्ची बनवाने, शुल्क जमा कराने और अन्य सहायक सेवाओं में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई मरीजों और उनके परिजनों को अलग-अलग काउंटरों के चक्कर लगाने पड़े। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था करने का दावा किया, लेकिन कर्मचारियों की कमी का असर साफ दिखाई दिया।

यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर गए हैं। उनका कहना है कि 24 घंटे तक सांकेतिक रूप से सेवाएं बाधित रखी गईं और यदि उनकी मांगों का समाधान जल्द नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यूनियन ने कहा कि शुक्रवार सुबह बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों की गंभीर देखभाल से जुड़ी सेवाएं पूरी तरह चालू रहीं। आईजीएमसी के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राहुल राव ने बताया कि आपातकालीन और ट्रॉमा सेवाएं पूरे दिन सुचारू रूप से चलती रहीं। मुख्य ऑपरेशन थियेटर सामान्य रूप से संचालित हुए। उन्होंने बताया कि ओपीडी में 1211 मरीजों की जांच की गई। इसके अलावा 15 बड़े ऑपरेशन और 78 छोटे ऑपरेशन किए गए।

डॉ. राव के अनुसार सभी क्रिटिकल केयर क्षेत्र, वार्ड, निदान सेवाएं, सुरक्षा और रोगी सहायता सेवाएं भी जारी रहीं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों, नर्सिंग स्टाफ और आउटसोर्स एजेंसियों के समन्वय से यह सुनिश्चित किया गया कि मरीजों की देखभाल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि जरूरी सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं, लेकिन हड़ताल के कारण सामान्य प्रक्रियाओं में आई रुकावट ने मरीजों को असुविधा जरूर दी। अब सभी की नजरें यूनियन और प्रशासन के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि आने वाले दिनों में सेवाएं सामान्य रहेंगी या आंदोलन और आगे बढ़ेगा।