के तहत आने वाले विभिन्न आठ महाविद्यालयों के छात्र एवं छात्राएं भाग ले रहे हैं।
कुलपति
प्रो. कम्बोज ने मंगलवार काे युवाओं को संबाेधित करते हुए कहा कि युवा महोत्सव केवल सांस्कृतिक
मंच नहीं, बल्कि युवाओं को प्रतिभा, ऊर्जा और रचनात्मकता को दिशा देने का सशक्त माध्यम
है। यह मंच युवाओं को अपनी कला, विचार और व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान
करेगा। उत्सव युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और संवाद कौशल की दिशा में एक
मील का पत्थर साबित होगा। इससे लोक कला, लोक संगीत, और लोक परम्पराओं को नई पीढ़ी तक
पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। युवा महोत्सव से युवाओं में राष्ट्रीय एकता और सदभाव,
रचनात्मक ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग, टीम भावना और अनुशासन के साथ कार्य करने में मदद
मिलेगी।
प्रो.
कम्बोज ने कहा कि इससे राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ
साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। युवा महोत्सव युवाओं को केवल मनोरंजन
नहीं देता बल्कि उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में
प्रेरित करता है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों
में भी बढ़-चढ़ कर भाग लेना चाहिए ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सकें। उन्होंने कहा
कि देश की सांस्कृतिक विरासत को सजीव बनाए रखने के लिए युवा प्रतिस्पर्धा एवं चुनौतियों
का दृढ़ता के साथ मुकाबला करके राष्ट्र और समाज के नव निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान
देने के लिए आगे आएं।
छात्र
कल्याण निदेशक डॉ. रमेश यादव ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि विभिन्न आठ महाविद्यालयों
के छात्र-छात्राएं रंग बिरंगी पोशाकों में ढोल नगाड़ों के साथ नाचते गाते हुए उत्सव
में पहुंचे। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय उत्सव में भाषण प्रतियोगिता, एकल गायन, लोकगीत,
समूह गायन, वेस्टर्न सोंग, समूह गायन, कोरयोग्राफी, एकल नृत्य, फैंसी ड्रेस, वाद-विवाद,
नुक्कड़ नाटक सहित विभिन्न कार्यक्रम शामिल हैं। डॉ. एसके पाहुजा ने धन्यवाद किया।
मंच संचालन छात्रा साक्षी और जसमीन ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव सहित विभिन्न महाविद्यालयों
के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, निर्णायक मंडल के सदस्य, वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी
उपस्थित रहे।