कानपुर, 25 मार्च । ब्लू इकॉनमी भारत के लिए अपार संभावनाएं लेकर आई है, जो ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और मजबूत नीतिगत ढांचे की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन और समुद्री पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान संतुलित और विज्ञान आधारित दृष्टिकोण से ही संभव है। यदि इन पहलुओं पर समन्वित तरीके से कार्य किया जाए तो ब्लू इकॉनमी भारत के सतत विकास और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। यह बातें बुधवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहीं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी द्वारा स्वस्तिभवतु व्याख्यान श्रृंखला के तहत चौथे व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रावत फैमिली ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है।
इस दौरान डॉ. एम. रविचंद्रन ने “ब्लू इकॉनमी: भारत के अवसर और चुनौतियां” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत के विस्तृत विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और समुद्र आधारित संसाधनों की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि समुद्री संसाधनों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और जल की आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जा सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इन संसाधनों का सतत और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
व्याख्यान के दौरान जलवायु परिवर्तन, समुद्री पर्यावरण को हो रहे नुकसान और संसाधनों के अत्यधिक दोहन जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।
इस व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित करना और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।