हरदा, 10 मार्च । मध्य प्रदेश के हरदा जिले के खिरकिया ब्लॉक की चारूवा पंचायत में लगने वाला ऐतिहासिक गुप्तेश्वर चारूवा मेला इस वर्ष कई अव्यवस्थाओं के बीच आयोजित हुआ। प्रदेश के प्रमुख मेलों में गिने जाने वाले इस मेले में हर साल देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से व्यापारी और श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार व्यवस्थाओं की कमी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए।
जानकारों के अनुसार एक-दो दशक पहले यह मेला अपने विशाल बैल बाजार के लिए प्रसिद्ध था, जहां देश के विभिन्न राज्यों से व्यापारी और खरीदार आते थे। समय के साथ मेले का स्वरूप बदलता गया और बैल बाजार के साथ ही टॉकीज, जादूगर, मौत का कुआं और चिड़ियाघर जैसे आकर्षण भी समाप्त हो गए। वर्तमान में मेला मुख्य रूप से झूलों और दुकानों तक सीमित होकर रह गया है।
स्ट्रीट लाइट बंद होने से अंधेरे की समस्या
मेले में दुकानों के बंद होने के बाद स्ट्रीट लाइट भी बंद हो जाती थी, जिससे रात में अंधेरा छा जाता था। इससे आने-जाने में लोगों को परेशानी होती रही और चोरी की आशंका भी बनी रहती थी। हाल ही में मेले में छोटी-बड़ी कई चोरी की घटनाएं सामने आईं। दुकानदारों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी और रात में चौकीदार भी नियमित गश्त करते नजर नहीं आए।
धूल से परेशान रहे लोग
मेले में दिनभर धूल का गुबार छाया रहता था, जिससे दुकानदारों और आगंतुकों को काफी परेशानी हुई। खासतौर पर जिन लोगों को धूल से एलर्जी थी उन्हें अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
वसूली पर अधिक ध्यान, समस्याओं की अनदेखी
दुकानदारों का आरोप है कि मेला समिति के अधिकारी रसीद कट्टा लेकर शुल्क वसूली में तो सक्रिय दिखे, लेकिन सुरक्षा, सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का अभाव
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले मेले में विभिन्न शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए स्टॉल लगाए जाते थे, जिससे लोगों को योजनाओं की जानकारी मिलती थी और जरूरतमंद लाभ उठा पाते थे। इस बार ऐसे स्टॉल नजर नहीं आए।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
लोगों का कहना है कि इतने बड़े और ऐतिहासिक मेले में प्रशासन की ओर से सख्त निगरानी होनी चाहिए थी। यदि वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते तो व्यवस्थाएं और बेहतर हो सकती थीं। लाइटिंग, शौचालय, पेयजल और सुरक्षा जैसी सुविधाओं में कई कमियां देखने को मिलीं, हालांकि गुप्तेश्वर भगवान की कृपा से मेला बिना किसी बड़ी घटना के संपन्न हो गया, लेकिन व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल भी छोड़ गया।
वहीं विधायक प्रतिनिधि दुर्गादास पाटिल का कहना है कि चारूवा मेला इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है और मेला समिति की बेहतर व्यवस्थाओं के कारण यह निर्विघ्न संपन्न हुआ। मेले में पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था रही तथा भविष्य में इसे और बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
मेला समिति की अध्यक्ष पूनम पाटिल के अनुसार मेले के संचालन के लिए समिति का गठन कर सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं और व्यवस्थाओं की निगरानी भी की जा रही थी। उन्होंने बताया कि प्रशासन का भी सहयोग मिला, हालांकि पुलिस बल की कमी के कारण चोरी की कुछ घटनाएं सामने आईं।