नई दिल्ली, 11 मार्च । दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व सीएम मनीष सिसोदिया ने आबकारी नीति केस को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट से हटाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस डीके उपाध्यायको पत्र लिखा है। केजरीवाल ने आशंका जताई है कि अगर इस मामले पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच सुनवाई करती है, तो मामले की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।
अरविंद केजरीवाल ने पत्र में कहा है कि 9 मार्च को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने बिना उनका पक्ष सुने ही आदेश पारित कर दिया है और ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं बताई गयी है। पत्र में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप मुक्त करने के आदेश पर रोक असाधारण परिस्थितियों में ही लिया जाता है, लेकिन 9 मार्च के आदेश में ऐसा कुछ नहीं बताया गया है कि वे असाधारण परिस्थितियां क्या थीं। अरविंदकेजरीवाल ने कहा है कि सीबीआई की ओर से दायर याचिका में ईडी के मामले में भी आदेश पारित कर दिया गया, जबकि उसमें ईडी पक्षकार भी नहीं था। अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आम तौर पर इस तरह की याचिकाओं में जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम चार से पांच हफ्ते का समय दिया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने 9 मार्च को अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपितों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपितों को नोटिस जारी किया था। उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सीबीआई पर किए गए प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि वो दिल्ली आबकारी घोटाला मामले से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामले की आगे सुनवाई नहीं करें।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को सभी आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट में काफी विरोधाभास हैं। कोर्ट ने कहा कि हजारों पेजों के चार्जशीट में जो तथ्य पेश किए गए हैं वे गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे। अरविंद केजरीवाल दो बार के अंतराल में 156 दिन जेल में रहे। अरविंद केजरीवाल 13 सितंबर, 2024 को तब रिहा हुए जब उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई के मामले में जमानत दी।