एसीएस गृह और डीजीपी ने कहा मशीनी अंदाज में नहीं होगा पैरोल मामलों का निस्तारण

जयपुर, 16 मार्च । कैदियों के पैरोल प्रार्थना पत्रों के निस्तारण को लेकर अदालती आदेश की पालना में एसीएस गृह भास्कर ए सावंत और डीजीपी राजीव शर्मा वीसी के जरिए हाईकोर्ट से जुडे। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि वे पैरोल प्रकरणों की बारीकी से मॉनिटरिंग करेंगे। वहीं ऐसे मामलों को मशीनी अंदाज में तय करने के बजाए उचित नियमों से तय किया जाएगा। इसके साथ ही पैरोल प्रकरणों में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की सिफारिशों का भी ध्यान में रखा जाएगा। दोनों अधिकारियों के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ताओं को पैरोल दी जा चुकी है। ऐसे में मामले का निस्तारण किया जाता है। जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश अनिल कपूर व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एएजी राजेश चौधरी ने कहा कि बीते साल सात के पैरोल मामले को देखने से पता चलता है कि करीब साठ फीसदी प्रकरणों में पैरोल दिया जा रहा है। वहीं नए आदेशों को निचले अफसरों तक पहुंचाया जा रहा है।

याचिका में अधिवक्ता जीपी रावत ने कहा कि याचिकाकर्ता बीते चार साल से ओपन जेल में है और अब तक 12 साल की सजा भुगत चुका है। उसने नियमित पैरोल के लिए आवेदन किया था। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, भरतपुर के संयुक्त निदेशक ने गत 31 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को पैरोल देने की सिफारिश की थी, लेकिन स्थानीय एसपी ने उसे पैरोल देने पर अप्रिय घटना होने का अंदेशा जताते हुए पैरोल नहीं देने को कहा। ऐसे में उसका प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने गत सुनवाई को एसीएस गृह और डीजीपी को इस संबंध में जानकारी देने को कहा था।