जबलपुर, 24 मार्च । मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सोम डिस्टिलरीज से जुड़ी एक अहम याचिका खारिज करते हुए एक्साइज कमिश्नर द्वारा 8 लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई को सही ठहराया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने 32 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई पूरी तरह वैध है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शराब का कारोबार पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में आता है और इस क्षेत्र में लाइसेंसधारियों को नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस का निलंबन या निरस्तीकरण कानूनन उचित माना जाएगा।
दरअसल, एक्साइज विभाग ने 4 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर सोम डिसलरी प्राइवेट लिमिटेड और सोम ब्रेवरीज के कुल 8 लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। यह कार्रवाई 26 फरवरी 2024 को जारी शो-कॉज नोटिस के आधार पर की गई थी, जिसमें फर्जी परमिट के जरिए शराब परिवहन के आरोप लगाए गए थे।
कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि नोटिस 2023-24 की अवधि से संबंधित था और 31 मार्च 2024 को संबंधित लाइसेंस समाप्त हो चुके थे। नए लाइसेंस जारी होने के बाद पुराने नोटिस के आधार पर कार्रवाई को अवैध बताया गया।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि एक्साइज एक्ट के तहत विभाग को कार्रवाई का स्पष्ट अधिकार है और नियमों का पालन अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शो-कॉज नोटिस किसी एक अवधि तक सीमित नहीं होता। गंभीर आरोप होने की स्थिति में बाद में भी कार्रवाई की जा सकती है और पूर्व में किए गए उल्लंघन नए लाइसेंस को भी प्रभावित कर सकते हैं।
इस फैसले को राज्य में शराब कारोबार से जुड़े नियमों के सख्त अनुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।