दंतेवाड़ा, 03 मार्च । दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा में फागुन मंडई में आंवरामार रस्म के बाद सती सीता प्रतिमा स्थल पर साेमवार देर रात्री में होलिका दहन किया गया।
पुजारी हरेंद्र नाथ जिया ने बताया कि मंदिर से पुजारी, सेवादार व ग्रामीण पूजा सामग्री के साथ सती सीता प्रतिमा स्थल पहुंचते हैं। गंवरमार रस्म में गंवर तैयार करने के लिए प्रयुक्त बांस का ढांचा व ताड़ फलंगा धोनी में प्रयुक्त ताड़ के पत्तों से होली सजाकर जन समूह की उपस्थिति व पारंपरिक वाद्ययंत्र बाजा मोहरी की गूंज के बीच प्रधान पुजारी द्वारा होलिका दहन की रस्म पूरी की गई है। इसके दूसरे दिन रंग-भंग का कार्यक्रम होता है। इसमें सर्वप्रथम होलिका दहन स्थल से होली की राख तथा पलाश के फूलों से तैयार रंग से एक दूसरे के माथे में टीका लगाकर होली खेली जाती है।
इस होली मेें कृत्रिम रंगों का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि पलाश के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाती है। उन्हाेने बताया कि चंद्रग्रहण के कारण आज बुधवार काे होली खेली जायेगी। उन्हाेने बताया कि पलाश के फूलों से राउत परिवार के सदस्य रंग तैयार करते हैं। यहां कृत्रिम रंगों का प्रयोग नहीं होता। मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया के अनुसार राउत परिवार के सदस्य जंगल से पलाश के फूल लेकर आते हैं। फूलों को सुखाकर पाउडर बनाया जाता है। हंडी में चुना, हल्दी तथा फूलों के पाउडर को गुनगुने पानी में मिलाकर रंग बनाया जाता है।