जयपुर, 25 मार्च । चैत्र के वासंतिक नवरात्र के सातवें दिन बुधवार को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की गई। मां कालरात्रि को सभी नकारात्मक शक्तियों का विनाश करने वाली और शत्रुओं का नाश करने वाली देवी माना जाता है। यह रूप अत्यंत उग्र होने के साथ-साथ भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी है। गुरुवार को अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन होने के कारण कन्याओं को भोजन कराकर उपहार दिए जाएंगे। कई लोग 27 मार्च को कन्या पूजन करेंगे। आमेर रोड कनक घाटी स्थित मनसा माता मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में मृगशिरा नक्षत्र में मनसा माता का पूजन किया गया। नव पत्रिका प्रवेश कर नव पत्रिका स्थापना की गई। मातारानी को विविध फल, भंग और छत्र अर्पित किया गया। गुरुवार को अष्टमी तिथि पर सुबह साढ़े आठ से दोपहर बारह बजे तक आद्र्रा नक्षत्र में संधि पूजन किया जाएगा। मातारानी को 108 नील कमल अर्पित किए जाएंगे।
देवी मंदिरों में शहर के प्रमुख मंदिर जय माता दी के जयकारों से गुंजायमान रहे। सुख-समृद्धि, संतति और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना लेकर भक्तजन पूरे श्रद्धाभाव से मां भगवती की उपासना में लीन रहे। मंदिरों में विधि-विधान के साथ कलश पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन-यज्ञ तथा विशेष अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने मां को फल, पुष्प, नारियल, चुनरी एवं मिष्ठान अर्पित कर अपनी आस्था व्यक्त की। साथ ही भजन-कीर्तन एवं जागरण के माध्यम से माता की महिमा का गुणगान किया गया।
आमेर स्थित प्रसिद्ध शिला देवी मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त माता रानी के दर्शन करने पहुंचे। यहां मां का आभूषणों एवं मनमोहक पुष्पों से श्रृंगार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाआरती उतारी गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में दिनभर दर्शन-पूजन का क्रम निरंतर जारी रहा। घाटगेट श्मशान स्थित काली माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। यहां स्कंदमाता के स्वरूप का विशेष श्रृंगार कर किया गया। गया।
गलता पीठ के मंदिरों में सुबह से ही घंटा-घडिय़ाल की ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। दुर्गापुरा स्थित दुर्गा माता मंदिर में भी पंचम नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन किया गया। वहीं खोले के हनुमान जी मंदिर में राम चरित मानस की चौपाइयों का पाठ किया गया।