जयपुर, 11 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के गढ गणेश मंदिर में रोपवे के निर्माण पर दिए यथा-स्थिति के आदेश को वापस ले लिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में दायर याचिका को भी निस्तारित कर दिया है। अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायतों और जिला कलेक्टर के 1 मई, 2024 के आदेश के खिलाफ अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर कर सकता है। अदालत ने पन्द्रह दिन में अपील पेश होने पर उसे समय-सीमा के भीतर मानने के आदेश दिए हैं। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड की याचिका का निस्तारण करते हुए दिए। अदालत ने मामले में गत 1 अगस्त, 2024 को रोपवे के निर्माण पर यथा-स्थिति के आदेश दिए थे।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने गढ गणेश मंदिर में रोपवे के निर्माण के लिए आवेदन किया था। वहीं मंदिर ट्रस्ट को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से स्वीकृति देने के खिलाफ याचिकाकर्ता ने जिला कलेक्टर के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराई थी। जिसका निस्तारण नहीं होने पर पूर्व में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। जिसके अदालत ने 18 मार्च, 2024 को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता व अन्य को सुनवाई का मौका देकर आपत्तियों को विस्तृत आदेश से निस्तारित करने को कहा। याचिका में कहा गया कि कलेक्टर ने 1 मई, 2024 को याचिकाकर्ता की आपत्तियों का निस्तारण कर आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि सरकार ने मंदिर ट्रस्ट को रोप-वे निर्माण की अनुमति दी थी, लेकिन ट्रस्ट ने इसका काम मैसर्स शिवम प्राइम इन्फ्रा को सौंप दिया, जबकि इस कंपनी ने रोपवे निर्माण के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था। याचिका में बताया गया कि उसने पुष्कर और उदयपुर सहित देश में करीब डेढ़ दर्जन जगहों पर रोप-वे का निर्माण किया है। याचिका में यह भी कहा गया कि पूर्व में अदालत के आदेश पर याचिकाकर्ता ने कलेक्टर को इस संबंध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थी, लेकिन कलेक्टर ने आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया। जिसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल ने कहा कि रोपवे अधिनियम की धारा 22 के तहत कलेक्टर के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार के समक्ष अपील की जाएगी। ऐसे में वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के कारण याचिका को खारिज किया जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका को निस्तारित कर दिया है।