नई दिल्ली, 25 मार्च । उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के लिए एक कल्याण कोष स्थापित करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑल इंडिया (बीसीआई), बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) और उच्चतम न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने वकीलों के लिए ऐसे किसी फंड की स्थापना समय की जरुरत है।
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने दायर की है। सुनवाई के दौरान एससीबीए की ओर से पेश वकील विकास सिंह ने कहा कि एडवोकेट वेलफेयर एक्ट में एक तकनीकी गड़बड़ी है, जिसकी वजह से उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता है। वर्तमान में ये कानून राज्य बार काउंसिलों के जरिये संचालित होता है। इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए वकील का किसी राज्य बार एसोसिएशन का सदस्य होना अनिवार्य है जबकि एससीबीए को इस कानून के तहत स्वतंत्र दर्जा प्राप्त नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय में दाखिल होने वाले वकालतनामे के जरिये जमा होने वाली राशि बीसीडी को जाती है। इससे उन वकीलों के लिए संकट हो जाता है, जो अपने गृह राज्यों की बार काउंसिलों से दूर दिल्ली में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन वकीलों के पास मेडिकल इमरजेंसी या किसी दूसरे अप्रत्याशित वित्तीय संकट के समय कोई ठोस सुरक्षा ढांचा नहीं होता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात का संकेत किया कि उच्चतम न्यायालय रुल्स 2013 में संशोधन कर और इसमें एक नया नियम जोड़कर इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।