गुरुग्राम : भारत में युवा शक्ति सबसे बड़ी ताकत : डा. राज नेहरू

गुरुग्राम, 10 अप्रैल । गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में एआई और कानून के तालमेल पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने की, जबकि मुख्य संरक्षक के रूप में कुलसचिव डॉ. संजय अरोड़ा उपस्थित रहे।

विशेष आमंत्रित के रूप में फैकल्टी ऑफ लॉ दिल्ली यूनिवर्सिटी से वागेश्वरी देशवाल ने भी अपने विचार सांझा किए। सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कानून के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावशीलता को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दो दिवसीय सम्मेलन में कुल 192 विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें समकालीन कानूनी चुनौतियों और एआई के उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया गया। सम्मलेन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र के विजेता को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू ने कहा कि भारत जैसे देश में जहां युवा शक्ति सबसे बड़ी ताकत है, वहां एआई और कानून के क्षेत्र में शोध देश को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को भविष्य में भी ऐसे ही नवाचार और उत्कृष्टता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कुलपति डा. संजय कौशिक ने संबोधन में कहा कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीक का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था सहित समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि एआई और कानून के बीच संतुलन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ न्याय, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों की भी रक्षा सुनिश्चित की जा सके। अपने संबोधन में कुलसचिव डॉ संजय अरोड़ा ने सम्मलेन के सफल आयोजन के लिए डॉ. कनु प्रिय, डॉ. रेनू चौधरी समेत लॉ विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि एआई और कानून का समन्वय भविष्य की न्याय व्यवस्था को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाएगा। उन्होंने इस प्रकार के अकादमिक आयोजनों को ज्ञान-विनिमय और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।