साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, पांच आरोपित गिरफ्तार

नई दिल्ली, 12 अप्रैल । बाहरी उत्तरी जिले की साइबर थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए सभी आरोपित नरेला निवासी हैं, जिनकी पहचान राहुल (22), बंटी (22), अंकित (19), सलीम उर्फ धनचा (22) और नूर आलम (19) के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर में करीब 2.31 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े 43 मामलों में संलिप्त रहा है।

बाहरी उत्तरी जिले के पुलिस उपायुक्त हरेश्वर स्वामी ने रविवार को बताया कि मामला 4 अप्रैल को साइबर थाना बाहरी उत्तरी जिले में दर्ज एफआईआर संख्या 14/26 से संबंधित है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर मिली शिकायतों और “ऑपरेशन साइबर हॉक 4.0” के तहत विकसित तकनीकी इनपुट के आधार पर की गई।

जांच में पता चला कि आरोपित म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क चलाते थे। वे अपने या अन्य लोगों के नाम पर कई बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को कमीशन पर उपलब्ध कराते थे। साथ ही इन खातों से जुड़े सिम कार्ड भी उपलब्ध कराए जाते थे। इसके बदले उन्हें प्रति खाता 2500 से 5000 रुपये तक कमीशन मिलता था।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और डिजिटल साक्ष्य जैसे चैट रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन लॉग और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में अब तक 28 बैंक खातों की पहचान की गई है, जो महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में दर्ज मामलों से जुड़े पाए गए हैं।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपित ठगी की रकम को पहले विभिन्न खातों में घुमाकर छिपाते थे और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में बदल देते थे। इसके बाद यह रकम टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेज दी जाती थी, जिससे पैसे का ट्रेल छिपाया जा सके। तकनीकी जांच में एक विदेशी हैंडलर की लोकेशन कंबोडिया में पाई गई है, जिससे इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था और देशभर के लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाता था। फिलहाल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर भरोसा न करें, ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या वेबसाइट पर दें।