नई दिल्ली, 13 अप्रैल । उच्चतम न्यायालय ने डाटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती देने वाली एक और याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को भी दूसरी लंबित याचिकाओं के साथ टैग करने का आदेश दिया।
नई याचिका मजदूर किसान शक्ति संगठन की ओर से अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह ने दायर की है। इसके पहले 13 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया था। याचिका में डाटा प्रोटेक्शन कानून के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाने की मांग की गई है। 16 फरवरी को भी कोर्ट ने डाटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा था कि ये मामला संवेदनशील है। हमें दो कानूनों में संतुलन बनाना है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं वेंकटेश नायक, द रिपोर्टर्स कलेक्टिव और पत्रकार नितिन सेठी की ओर से दाखिल याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था।
याचिका में कहा गया है कि नया डाटा प्रोटेक्शन कानून सूचना के अधिकार कानून को गंभीर रुप से कमजोर करता है और केंद्र को इस मामले में असीमित शक्तियां देता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि ये कानून निजता की रक्षा करने में पूरे तरीके से विफल रहा है। उन्होंने कहा कि छेनी का इस्तेमाल करने की बजाय हथौड़े का इस्तेमाल किया गया है।