देहरादून, 11 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने अगली सुनवाई 18 मार्च की तिथि नियत की है।
मामले के अनुसार हल्द्वानी चोरगलिया निवासी भुवन चन्द्र पोखरिया ने अवमानना याचिका दायर कर कहा है कि उत्तराखंड में बारिश के समय नदियां उफान पर रहती हैं। नदियों के मुहाने अवरुद्ध होने के कारण बाढ़ व भू-कटाव होता है। इसके चलते आबादी क्षेत्र में जलभराव होता है। नदियों के उफान पर होने के कारण हजारों हैक्टेयर वन भूमि, पेड़, सरकारी योजनाएं बह जाती हैं। नदियों का चैनलाइजेशन नहीं होने पर नदियां अपना रुख आबादी की तरफ कर कर देती हैं जिसकी वजह से उधम सिंह नगर, हरिद्वार, हल्द्वानी, रामनगर, रुड़की, देहरादून में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पिछले साल बाढ़ से कई पुल बह गए थे। आबादी क्षेत्रों में बाढ़ आने का मुख्य कारण सरकार की लापरवाही है। सरकार ने नदियों के मुहानों पर जमा गाद, बोल्डर, मलबा को नहीं हटाया है।
अवमानना याचिका में कहा गया कि सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश 14 फरवरी 2023 का पालन नहीं किया, जिसकी वजह से प्रदेश में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है और सरकार को एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान बाढ़ आपदा से हुआ है। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार संबंधित विभागों को साथ लेकर नदियों से गाद, मलबा, बोल्डर हटाकर उन्हें चैनलाइजेशन करें, ताकि बरसात में नदियों का पानी बिना रुकावट के बह सके लेकिन, अभी तक सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया, जबकि कुछ महीनों के बाद बारिश का सीजन शुरू हो जाएगा। अवमानना याचिका में जिलाधिकारी नैनीताल व जिलाधिकारी हरिद्वार को पक्षकार बनाया गया है।