शिक्षा को शिक्षार्थी केन्द्रित बनाया जाना चाहिए : महेन्द्र कुमार
रांची, 15 सितंबर (हि.स.)। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरीय राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार ने रविवार को कहा कि महासंघ आगामी वर्ष में सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों में पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्यों, स्व-जागरण तथा ‘सभी भारतीय एक हैं’ विषयों पर विशेष जागरुकता कार्यक्रम चलाएगा। यह वक्तव्य महेन्द्र कुमार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में रविवार काे आयोजित महासंघ के उच्च शिक्षा संवर्ग के झारखण्ड प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए दिया।
महेन्द्र कुमार ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से भारतीयता के मूल सिद्धांतों का प्रसार करने में हम समर्थ होंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा को शिक्षार्थी केन्द्रित बनाया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास हो सके और वह बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक स्तर पर सशक्त हो। उन्होंने महासंघ की प्रदेश इकाई को लक्ष्यों को निर्धारित कर उन्हें पूरा करने की दिशा में तत्परता से कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने आश्वस्त किया कि महासंघ की केंद्रीय इकाई आवश्यकतानुसार राज्य इकाई को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि महासंघ की राज्य इकाई के विभिन्न प्रकोष्ठों को पूरी सक्रियता के साथ अपने लक्ष्य की सिद्धि में संलग्न होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को चिन्हित कर उनके समाधान के लिए समर्पित प्रयास करने पर जोर दिया।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. सुदेश कुमार साहू ने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि शैक्षिक महासंघ का उद्देश्य केवल शिक्षकों के हितों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सामूहिक प्रयास करना भी है। उन्होंने शिक्षा के उच्चतम मानकों को स्थापित करने और उनके पालन में सहयोग देने के प्रति महासंघ की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का दायित्व शिक्षकों के कंधों पर है और चाहे हम किसी भी विषय के शिक्षक हों, हमारा उद्देश्य छात्रों को पाठ्यक्रम की जानकारी देने के साथ-साथ समाज और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देना भी होना चाहिए।
शिक्षा समाज का आधार स्तम्भ है और शिक्षक उस स्तम्भ के निर्माता : डॉ. राजकुमार शर्मा
महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजकुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षा समाज का आधार स्तम्भ है और शिक्षक उस स्तम्भ के निर्माता हैं। शिक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता जितनी दृढ़ होगी, राष्ट्र का भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समाज में अपनी उचित पहचान बनाए रखने के लिए महासंघ को ठोस प्रयास करने चाहिए। उन्होंने महासंघ द्वारा यह सुनिश्चित करने के प्रयास की आवश्यकता पर भी जोर दिया कि शिक्षा संबंधी नीतियों के निर्माण में शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भागीदारी हो।
बैठक में महासंघ के भूतपूर्व राज्य अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने सुझाव दिया कि महासंघ को समय-समय पर संगोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन करना चाहिए, जिससे शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ समाज की दिशा और दशा तय करने में योगदान करने का अवसर मिले। पूर्व राज्य महामन्त्री डॉ. ब्रजेश कुमार ने कहा कि किसी संगठन की सफलता उसके कार्यकर्ताओं, कार्यक्रमों और कार्यपद्धति पर निर्भर करती है।
बैठक के दौरान महासंघ के प्रदेश महामन्त्री डॉ. अभय कृष्ण सिंह ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए विषय प्रवर्तन किया। डॉ. स्मृति सिंह, डॉ. कुमुद कला मेहता, डॉ. किशोर सुरीन, डॉ. जयप्रकाश आनन्द आदि सदस्यों ने भी विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन शैक्षिक प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने किया।
बैठक में यह निश्चय किया गया कि शैक्षिक महासंघ की प्रादेशिक इकाई द्वारा सितम्बर मास में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के संबंध में व्याख्यानमालाओं तथा अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। दिसम्बर मास में ‘वैश्विक मंच पर भारत का पुनरुत्थान’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धरोहर एवं पुनरुत्थान की दिशा में महत्त्वपूर्ण संवाद स्थापित होगा, जिससे जनमानस में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना जागृत हो सकेगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सांस्कृतिक अभ्युत्थान को प्रोत्साहित करना है।
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