जन सुविधा सफाई यूनियन का झंड़ा मार्च: चंडीगढ़ नगर निगम पर डीसी रेट की मांग!

चंडीगढ़ में सफाई सेवक यूनियन ने नगर निगम के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन किया है जिसमें उन्होंने डीसी रेट्स को लागू करने और लंबित वेतन की मांग उठाई। यूनियन के बैनर तले सैकड़ों सफाई कर्मचारी शवलिक होटल से नगर निगम के दफ्तर तक झंडा मार्च कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए जोरदार नारेबाजी की। सफाई कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाएंगी, वे अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 8 अक्टूबर को गवर्नर हाउस तक मार्च और 10 अक्टूबर को पुतला दहन करने का भी आवाहन किया है।

प्रदर्शन के दौरान, कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख सतिंदर सिंह, महासचिव राकेश कुमार, यूनियन के अध्यक्ष अशोक बेनीवाल, उप-प्रधान यशपाल राणा और मोहिंदर ढीलों ने अपने संबोधन में कहा कि दिवाली से पहले चार महीने से लंबित वेतन और बोनस का तत्काल भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि नगर निगम के अंतर्गत काम कर रहे कर्मचारियों पर डीसी रेट्स को लागू करना बेहद आवश्यक है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे श्रमिकों के शोषण को रोकने और श्रम कानूनों के अनुपालन की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस प्रदर्शन में नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर जीएस सोढ़ी ने भी भाग लिया और उन्होंने कर्मचारियों की मांगों का एक ज्ञापन स्वीकार किया। सोढ़ी ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में समस्या के समाधान के लिए हाउस में जल्द ही चर्चा की जाएगी। यह कर्मचारियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन उनकी संतोषजनक समाधान की प्रतीक्षा अभी भी जारी है।

प्रदर्शन में शामिल कई प्रमुख नेताओं ने भी अपनी आवाज उठाई। इनमें कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ गवर्नमेंट एंड एमसी एंप्लॉयज एंड वर्कर्स यूटी चंडीगढ़ के अध्यक्ष सतिंदर सिंह, जीएचएमसी ज्वाइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष सुखबीर सिंह, बिजली यूनियन के प्रमुख किशोरी लाल, वाटर सप्लाई यूनियन के अध्यक्ष राजिंदर कुमार, सुरिंदर शर्मा, तालब हुसैन और महिला विंग की अध्यक्ष गीता शामिल थे। सभी नेताओं ने एकजुटता के साथ कर्मचारियों के हक की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की शपथ ली।

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य न केवल कर्मचारियों को उनके अधिकार दिलाना है, बल्कि उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाना भी है। सफाई कर्मियों के इस संघर्ष का प्रभाव न केवल चंडीगढ़ में बल्कि पूरे देश में श्रमिकों के अधिकारों को मजबूती प्रदान कर सकता है। कर्मचारी संगठनों की इस एकजुटता से यह स्पष्ट होता है कि वे अपने हक के लिए निर्णायक रूप से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं और अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं।