सूर्या एनक्लेव: 2 साल से बंद स्टोरेज टैंक, ट्रस्ट ने चंडीगढ़ को भेजा एनओसी प्रस्ताव

जालंधर के सूर्या एनक्लेव में स्थित स्टोरेज टैंक की खुदाई का कार्य पिछले दो वर्षों से ठप पड़ा है। अब, इसके लिए जांच समिति (जेआईटी) ने 25 सितंबर को एक महत्वपूर्ण मता पास किया है, जिसे चंडीगढ़ में मंजूरी प्राप्त करने के लिए भेजा गया है। इस मता के बाद, माइनिंग विभाग से खुदाई की अनुमति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके बाद ही कार्य को फिर से शुरू करने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि सरफेस वाटर प्रोजेक्ट के तहत पेयजल लाइनों का बिछाने का कार्य जारी है, जिसमें आतंरिक सड़कों पर 46 किलोमीटर पेयजल लाइन का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

वहीं, इस परियोजना के अंतर्गत सड़कों के निर्माण के लिए 34 करोड़ रुपए का बजट मंजूर हो चुका है। निर्माण एजेंसी ने अब मॉडल टाउन में संघ चौक और डीएवी कॉलेज से कैनाल रोड तक पानी की लाइनों का कार्य शुरू कर दिया है, जो पिछले दो महीनों से रुका हुआ था। सूर्या एनक्लेव में स्टोरेज टैंक की खुदाई का कार्य दो साल पहले माइनिंग विभाग द्वारा बिना सीएलयू (भूमि उपयोग परिवर्तन) की अनुमति के कारण रोक दिया गया था।

सीवर बोर्ड ने जेआईटी को आवश्यक एनओसी प्राप्त करने के लिए पत्र लिखा था, जिसके परिणामस्वरूप, ट्रस्ट ने 25 सितंबर को एक बोर्ड मीटिंग में एनओसी का मता पास किया। इस मता को चंडीगढ़ के संबंधित अधिकारियों के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। सीवर बोर्ड के एक्सईएन जतिन वासूदेवा ने जानकारी देते हुए बताया कि ट्रस्ट की मीटिंग में एनओसी के साथ-साथ सीएलयू का भी जिक्र किया गया है। इस बार, जेआईटी द्वारा दी गई एनओसी में सीएलयू की जानकारी सम्मिलित की गई है, जो इसे पहले की एनओसी से अलग बनाती है।

इस मता के आधार पर, सीवर बोर्ड माइनिंग विभाग में सीएलयू के लिए आगे की प्रक्रिया प्रारंभ करेगा। माइनिंग विभाग से सीएलयू प्राप्त होने के बाद ही सूर्या एनक्लेव में खुदाई का काम दोबारा शुरू होगा। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, शहर में 98 किलोमीटर पेयजल लाइन बिछाई जानी है, जिसमें से 45 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है। जगरावां से शहर की मुख्य पेयजल लाइन 15.50 किलोमीटर लंबी निर्धारित की गई है, जिसमें से 12.50 किलोमीटर का कार्य भी संपन्न हो चुका है।

आखिरकार, सरफेस वाटर प्रोजेक्ट की दूसरी चरण की डेडलाइन सितंबर 2024 है, और इस संदर्भ में स्टोरेज टैंक के चारों ओर फेंसिंग का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। सूर्या एनक्लेव मामले में हो रही प्रगति से स्थानीय निवासियों के बीच उम्मीद जगाई है कि जल्द ही इस क्षेत्र में पेयजल की समस्या का समाधान होगा और विकास कार्य आगे बढ़ेगा।