गैंगस्टर के पिता बने सरपंच: डर के साए में खाली रहा चुनाव मैदान

पंजाब के फरीदकोट जिले के बहिबल कलां गांव में सरपंच पद के लिए किसी भी इच्छुक व्यक्ति ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है। इस स्थिति के पीछे गांव के notorious गैंगस्टर सिम्मा का डर माना जा रहा है। बताया गया है कि सिम्मा ने हाल ही में कुछ गांववासियों को अपने घर बुलाकर अपने पिता को सरपंच घोषित कर दिया था। इस डर की वजह से गांव के लोग सरपंच पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से हिचकिचा रहे हैं। सिम्मा के खिलाफ 26 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो उसके खौफ को और बढ़ाते हैं।

हाल ही के दिनों में दाना मंडी के समीप पुलिस ने दो कारें और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद किए थे, जो सिम्मा से संबंधित बताए जा रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन सिम्मा मौके से फरार हो गया। गांव के लोग उसके आतंक से भयभीत हैं और इसके चलते चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। फरीदकोट के एसपी बलजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि गांव से कोई भी नामांकन पत्र दाखिल न किए जाने की जानकारी उन्हें उपलब्ध नहीं है, लेकिन उन्होंने ग्रामीणों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नामांकन स्थलों पर सुरक्षा के लिए जवान तैनात हैं और वे स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं। एसपी बलजीत सिंह ने कहा कि सिम्मा ने जो कुछ भी किया है, उसके खिलाफ पुलिस उचित कार्रवाई कर रही है। हालांकि, गांव से किसी भी व्यक्ति के द्वारा सिम्मा के भय के चलते नामांकन पत्र न दाखिल करने की कोई औपचारिक शिकायत पुलिस के पास नहीं आई है। एसपी ने इस समस्या का सामना करने के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

इस मामले में, ग्रामीणों का डर कहीं न कहीं सिम्मा की शक्तियों और उसके द्वारा किए गए अपराधों का परिणाम है। अगर स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित करेगा, बल्कि स्थानीय समुदाय के विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा। पुलिस का वादा सुरक्षा प्रदान करने का है, लेकिन गांववासियों को विश्वास दिलाना और उनका सहयोग प्राप्त करना भी आवश्यक है, ताकि वे सिम्मा के भय से बाहर निकलकर अपनी आवाज उठा सकें।

सुरक्षा बलों को चाहिए कि वे न केवल गांव में रुकें, बल्कि लंबे समय तक स्थायी समाधान की दिशा में कार्य करें। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। इससे न केवल गांववासियों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि अन्य गांवों के लिए यह एक मिसाल भी बनेगा कि अगर लोग एकजुट हों और प्रशासन उनका समर्थन करे, तो वे ऐसे खतरनाक तत्वों का सामना कर सकते हैं।