31 साल पुराने हत्या मामले में पूर्व DGP पर आरोप, हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को भेजा नोटिस!

पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक, सुमेध सिंह सैनी, ने अपने खिलाफ दर्ज हत्या के आरोपों के संदर्भ में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। सोमवार को अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें सैनी ने दावा किया कि पंजाब पुलिस उन्हें हर हाल में गिरफ्तार करने के प्रयास में है। उन्होंने यह भी बताया कि 1991 का एक मामला, जिसमें आरोप लगा हुआ है, उस पर तीस साल तक कोई कारवाई नहीं की गई, लेकिन 2020 में अचानक उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सैनी ने अपने याचिका में आरोप लगाया कि इस बीच में राजनीतिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है, और अगली सुनवाई की तिथी 25 नवंबर निर्धारित की गई है।

सुमेध सिंह सैनी, जो कि 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और जिनका पुलिस सेवा में 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है, ने याचिका में कहा कि वह 30 जून 2018 को सेवा से रिटायर हुए थे। इसके बाद, उनके प्रति पुलिस के वृत्तिकर्ता बाहरी दबाव और राजनीतिक कारणों के चलते लगातार केस दर्ज करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अदालत के समक्ष यह भी दर्शाया कि 11 अक्टूबर 2018 को उच्च न्यायालय ने उन्हें डीजीपी, आईजीपी या विभाग के प्रमुख के रूप में किसी भी मामले में गिरफ्तारी से रोका था। फिर भी, सैनी का कहना है कि पंजाब पुलिस ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया और उनका पीछा जारी रखा।

याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि सैनी के समय की अवधि में जब वे एसएसपी के पद पर कार्यरत थे, तब 1991 का एक मामला अचानक 2020 में उनके खिलाफ उठाया गया। उन्होंने अदालत में यह तर्क दिया कि यह स्पष्ट रूप से एक पूर्वाग्रहित कार्रवाई है। उनकी गिरफ्तारी का प्रयास, उन्होंने कहा, एक व्यवस्थित योजना का हिस्सा है जो राजनीतिक अदावतों के चलते निर्मित हुआ है।

सैनी ने यह अपील की कि यदि पंजाब पुलिस के इस रवैये पर रोक नहीं लगाई गई, तो उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा। इसी के साथ, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से उत्पन्न गुंडागर्दी का एक उदाहरण है। न्यायपालिका से अपेक्षा करते हुए, उन्होंने एक निष्पक्ष और तटस्थ जांच की भी मांग की है ताकि सत्यता सामने आ सके।

इस मामले में उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होने वाली है, जब यह तय किया जाएगा कि आगे की कारवाई कैसे की जाएगी। राजनीतिक संदर्भों में उनकी गिरफ्तारी की चालों को देखते हुए, सैनी की निगाहें न्यायपालिका की तरफ हैं, कि कैसे वह अपने इस कठिन दौर से बाहर निकल सकते हैं।