मुक्तसर जिले में विजिलेंस ब्यूरो ने रिश्वत मांगने के एक गंभीर मामले में दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। सीआईए स्टाफ मलोट के एएसआई बलजिंदर सिंह और सीनियर सिपाही गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में सीनियर सिपाही गुरप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एएसआई बलजिंदर सिंह की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं।
यह मामला तब सामने आया जब शिकायतकर्ता बलवीर सिंह उर्फ बीरा, निवासी गांव शेरावाला, ने मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पर शिकायत की। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया कि उनके खिलाफ नशीली गोलियों और हेरोइन की बड़ी मात्रा में बरामदगी का डर दिखाकर रिश्वत की मांग की गई। प्रारंभ में 2,50,000 रुपए की रकम की मांग की गई, लेकिन बाद में यह राशि घटकर 60,000 रुपए कर दी गई। शिकायतकर्ता ने इस मामले को उजागर करने के लिए संबंधित पुलिसकर्मियों के साथ की गई वार्तालाप की रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की।
विजिलेंस ब्यूरो के मुताबिक, प्रस्तुत की गई रिकॉर्डिंग में स्पष्ट रूप से दिखता है कि सीनियर सिपाही गुरप्रीत सिंह पहले 2,50,000 रुपए मांग रहे थे और बाद में 60,000 रुपए की मांग करते हुए सुनाई देते हैं। एएसआई बलजिंदर सिंह ने भी इस संदर्भ में रिश्वत लेने का स्पष्ट संकेत दिया। ऐसे में दोनों आरोपियों का एक साथ मिलकर रिश्वत मांगने का आरोप सिद्ध होने पर विजिलेंस ब्यूरो ने मामला दर्ज किया।
इस मामले की जांच करते हुए विजिलेंस ब्यूरो ने थाना विजिलेंस बठिंडा रेंज में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार-रोधी कानून के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीनियर सिपाही गुरप्रीत सिंह को हिरासत में लिया गया है, और जांच की प्रक्रिया आगे भी चल रही है। दूसरी तरफ, बलजिंदर सिंह की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तीव्रता से जारी हैं, ताकि उन्हें भी न्याय के कठघरे में लाया जा सके।
इस विवादास्पद मामले ने पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक और परत को उजागर किया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ न केवल पुलिस बल की छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि आम नागरिकों में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी हानि पहुँचाती हैं। विजिलेंस ब्यूरो की यह कार्यवाही ऐसे आरोपियों को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अपने पद का अनुचित लाभ उठाते हुए जनसेवा के विश्वास को भी लांघते हैं। अब यह देखना होगा कि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी कब होती है और उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई किस तरह से की जाती है।