कनाडा के कैलगरी में स्थित कुछ गुरुद्वारा साहिबों में नशे के सेवन के आरोपों को लेकर आज एक प्रतिनिधि मंडल ने श्री अकाल तख्त साहिब का दौरा किया। इस प्रतिनिधि मंडल ने जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें गुरुद्वारा साहिब में शिष्टाचार का उल्लंघन करने वाले प्रबंधकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की गई। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों, जिसमें शमशेर सिंह पधरी भी शामिल हैं, ने कहा कि यहां के कुछ गैर-अमृतधारी सेवक और प्रबंधक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, और नशे का सेवन कर रहे हैं।
प्रतिनिधि मंडल ने जानकारी दी कि जो लोग गुरुद्वारा साहिबों का प्रबंध देख रहे हैं, वे न केवल नशे का सेवन कर रहे हैं, बल्कि इस पर सार्वजनिक तौर पर आवाज उठाने वालों को धमकी दे रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति उनके खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है, जिससे समुदाय में अशांति का माहौल बना हुआ है। उन्होंने बताया कि हाल ही में गुरुद्वारा साहिब के बाहर भी इसी प्रकार का एक विवाद हुआ था, जहां उनके पक्ष के लोगों ने संगत पर हमला किया।
प्रतिनिधि मंडल ने गुरुद्वारा प्रबंधन के मानकों को भी उठाया, उन्होंने कहा कि सेवादारों को अवश्य ही अमृतधारी गुरसिख होना चाहिए। इस संदर्भ में दी गई निर्देशों की पालना के लिए सख्ती से उपाय किए जाने की आवश्यकता है। इसकी पुष्टि करते हुए, उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के अनुसार, गुरुद्वारों के सेवकों को अमृतधारी होना अनिवार्य है ताकि इस प्रकार के विवादों से बचा जा सके।
इसके अलावा, प्रतिनिधि मंडल ने मांग की कि उस प्रकार के सेवादारों और प्रबंधकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए, जो अन्य लोगों की आवाज दबाने के लिए जानबूझकर झूठे मामले दर्ज कराते हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताया, जो न केवल सिख समुदाय का बल्कि गुरुद्वारा साहिबों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई की आवश्यता को देखते हुए, प्रतिनिधि मंडल ने श्री अकाल तख्त साहिब से जल्द से जल्द एक निर्णय लेने की अपील की, ताकि सिख समुदाय की इस प्रकार की समस्याओं का समाधान हो सके।
इस परिस्थिति में, सभी पक्षों को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए सिख समुदाय की एकजुटता और गरिमा को बनाए रखने की दिशा में कार्य करना होगा। यदि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो यह भविष्य में और विवादों को जन्म दे सकता है, जिससे सिखों की धार्मिक आस्था प्रभावित हो सकती है।