परमार्थ निकेतन में मोतियाबिंद आपरेशन शिविर का शुरू, विश्वविख्यात चिकित्सक दे रहे हैं सेवाएं
ऋषिकेश, 17 नवंबर (हि.स. )। गंगा तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में रविवार काे मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का
उद्घाटन स्वामी चिदानन्द ने किया। इस विश्वविख्यात चिकित्सक मोतियाबिंद ऑपरेशन कर वृद्धजनों को नई रोशनी देंगे।
शिविर के उद्घाटन माैके पर स्वामी चिदानंद और अतिथिथाें ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया गया। शिविर में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, नजीबाबाद, पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात सहित कई राज्यों के लोग चिकित्सा सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। इस शिविर में अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। मोतियाबिंद मरीजों को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। प्रतिदिन 35 से 40 मोतियाबिंद के आपरेशन किये जा रहे है।
परमार्थ निकेतन का यह प्रयास नेत्र ज्योति महाज्योति का प्रतीक है, जो समाज के सभी वर्गों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने का एक महासंकल्प है। स्वामी चिदानंद मुनी ने कहा कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के माध्यम से कई लोगों की दृष्टि सुधारने का यह प्रयास विगत 20 वर्षों से निरंतर चल रहा है, और भविष्य में भी इस तरह के शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
इस माैके पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि समाज के अभावग्रस्त और निराश्रित लोगों को चिकित्सा सेवाएं देना एक उत्कृष्ट सेवा है, परन्तु वृद्धजनों की दृष्टि वापस लौटाना सबसे बड़ी सेवा है। चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सेवा का सबसे बड़ा रूवरूप है, जिसमें हम दूसरों के जीवन में खुशियां और रोशनी लाते हैं। समाज के सभी वर्गों में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार होता है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने सभी चिकित्सकों और स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया और उनके समर्पण की सराहना की।
आस्ट्रेलिया से आईं डाॅ पूर्णिमा राय ने कहा कि परमार्थ निकेतन ने इस मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर को एक विशिष्ट पहचान दी है। यह शिविर समाज के उन लोगों के लिए एक नई उम्मीद का स्रोत बना हुआ है, जिन्हें नेत्र चिकित्सा सेवाओं की अत्यंत आवश्यकता है। वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ मनोज पटेल ने कहा कि स्वामी की कृपा से सेवा की यह गंगा कई वर्षों से प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि हम यहां आकर केवल चिकित्सा सेवाएं ही नहीं देते बल्कि भारत की धरती पर आकर हमें भी शान्ति भी मिलती होती है। हमारा तन भले ही विदेश में हो परन्तु मन और आत्मा भारत व भारतीय संस्कृति के रंगों से रंगी है। परमार्थ निकेतन आकर गंगा का ध्यान और समय का दान करने का अवसर प्राप्त होता है।
इस शिविर में मिलिंद भिड़े, डॉ. जया मधुरी, डॉ. विजयलक्ष्मी, डॉ. संपत, डॉ. योग डॉ. हेतवी भट्ट, डॉ हाउ ट्रंक, डॉ. श्याम चंद परख, डॉ. सेंटन पोननियाह, डॉ. मोनिका कतलीन टेक्सी डॉ. विशाल भटनागर और अंजुला डॉ. विवेक जैन डॉ. विशाल भटनागर, वासवी, विमल रॉय, एलिस क्रॉफ्ट, जेनी मॉरिस, डेविड बटलर, मोनिका मूरी, डोना नॉर्टन, मेरी क्रॉफ्ट, सुनीता हरीश किरण रॉय, जय प्रज्ञा आर्य, गुरु प्रसाद , स्वाति, मंजू, और इयान, रीकी हेतवीयोला मौरचेड, नीलाई हेमंत सक्सेना, रेनू सक्सेना राकेश, प्रतीमा सक्सेना, निखिल सक्सेना, रत्नेश्वरी टंग्गावेल्लू, थेवरत्नम्मा पोननियाह डॉ. किंशुक बिस्वास, पियाली बिस्वास, महालिंगशिवम महंता और मालिनी, ब्रिजेट हांग फाम, परमालिंगन स्टीफन डीन सिटको और अंजुला भटनागर आदि तमाम चिकित्सक और सहायक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मोतियाबिंद चिकित्सा शिविर में मरीजों काे निःशुल्क आपरेशन सुविधाओं के साथ उन्हें दवाइयां, लेंस, रहने व भोजन की व्यवस्थाएं भी परमार्थ निकेतन की ओर से दी जा रही हैं।