हाल ही में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सड़क दुर्घटना में अपनी जान खोने वाले पूर्व सैनिक जसपाल सिंह के परिवार को मुआवजे के रूप में 19.27 लाख रुपये की राशि देने का आदेश दिया। यह दर्दनाक घटना 27 मई, 2021 को हुई थी जब जसपाल सिंह, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में एक सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे, अपनी बाइक पर खरड़ जा रहे थे। इस दौरान एक अन्य तेज रफ्तार बाइक ने गलत दिशा से आकर उन्हें टक्कर मार दी, जिसके कारण जसपाल गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई।
जसपाल सिंह के परिवार ने इस हादसे के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनके परिवारीजन, पत्नी चरणजीत कौर, बेटे तरनजीत सिंह, और बेटी सिमरप्रीत कौर ने स्पष्ट किया कि जसपाल परिवार का मुख्य कमाने वाला व्यक्ति था। उसे सेना से पेंशन के साथ-साथ विश्वविद्यालय से भी आय होती थी, और उसकी अचानक मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक संकट में फंस गया है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान, आरोपी बाइक चालक और मालिक ने यह दावा किया कि कोई दुर्घटना नहीं हुई और उन्हें झूठा फंसाया गया है। लेकिन न्यायाधिकरण ने पीड़ित परिवार द्वारा पेश किए गए सबूत, गवाहों की गवाही, और पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह पाया कि चालक की लापरवाही ही इस दुर्घटना का मुख्य कारण है।
जस्टिस ने जसपाल सिंह की मासिक आय और उसके परिवार की निर्भरता को ध्यान में रखते हुए, मुआवजे की राशि 19.27 लाख रुपये निर्धारित की। यह फैसला सुनते ही जसपाल सिंह का परिवार भावुक हो गया, और उन्होंने इस मुआवजे को न्याय का प्रतीक बताया। हालांकि परिवार ने माना कि जसपाल की कमी को कोई राशि पूरी नहीं कर सकती, फिर भी उन्हें यह निर्णय कुछ हद तक संतोष प्रदान करता है।
इस तरह के मामलों में न्याय का मिलना पीड़ित परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की बात होती है, जो सड़क पर होने वाली लापरवाहियों और दुर्घटनाओं के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने में भी मदद कर सकता है। ऐसे निर्णय निश्चित रूप से न केवल पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद प्रदान करते हैं, बल्कि समाज को यह संदेश भी देते हैं कि हर जीवन मूल्यवान है और किसी की लापरवाही के कारण किसी भी व्यक्ति का जीवन नहीं छीनना चाहिए।