अमृतसर के अजनाला थाना क्षेत्र में रविवार को मिले बम में बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े आतंकी हैप्पी पासियां और गोपी नवांशहरिया के नाम सामने आए हैं। पुलिस इस गंभीर मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दे रही है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बम में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था, जिसका वजन लगभग 800 ग्राम था। इस बम को थाने के दरवाजे से जोड़कर रखा गया था, ताकि दरवाजा खोलते ही धमाका हो सके। खास बात यह है कि इस घटना में थाने में कार्यरत पुलिसकर्मियों की किस्मत थी कि एक तकनीकी खराबी के कारण बम फटा नहीं, नहीं तो यह एक बड़ा नुकसान कर सकता था।
पंजाब पुलिस के कुछ सूत्रों का कहना है कि इस बम में डेटोनेटर भी लगाया गया था, जिससे इसके विस्फोट की आशंका थी। प्राथमिक जांच से यह भी पता चलता है कि बम को देर रात धुंध का फायदा उठाकर वहाँ रखा गया था। फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह घटना अमृतपाल सिंह से जुड़े अजनाला कांड के समानांतर, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक और चुनौती बन गई है।
फरवरी 2023 में, इसी अजनाला थाना क्षेत्र पर खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह और उसके कार्यकर्ताओं ने एक निंदनीय हमले को अंजाम दिया था। उस हमले में प्रदर्शनकारियों ने हथियारों के बल पर पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए थे और थाना परिसर में घुसने का प्रयास किया था। गुरु ग्रंथ साहिब को इस प्रदर्शन में ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया था, जिसके चलते पुलिस को बल प्रयोग नहीं करना पड़ा।
हैप्पी पासियां, जिसका असली नाम हरप्रीत सिंह है, एक कुख्यात गैंगस्टर है और फिलहाल अमेरिका में स्थित है। वह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा हुआ है। यह संगठन भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है। हाल ही में, पासियां ने चंडीगढ़ के सेक्टर-10 में एक ग्रेनेड हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसे उसने 1986 में हुए चार लोगों के एनकाउंटर का प्रतिशोध बताया। उसका सहयोगी गोपी नवांशहरिया भी कई गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल है और पूर्व बब्बर खालसा के आतंकियों की मृत्यु का जिम्मेदार माना जाता है।
इस प्रकार, जब से यह घटना हुई है, पंजाब में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ इस मुद्दे पर गहनता से जांच कर रही हैं, ताकि इस आतंकवादी साजिश का सटीक ढंग से पता लगाया जा सके। यह न केवल स्थानीय पुलिस के लिए, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को भी एक चुनौती देने वाली घटना बन गई है।