पूर्व सरपंच गुरदीप सिंह जेल में, STF हिरासत में रखेगी, परिजनों को मिलने की इजाजत।

लुधियाना के गांव रानों के पूर्व सरपंच गुरदीप सिंह उर्फ रानों को नशा तस्करी के मामलों में पिछले चार वर्षों से जेल में आरक्षित रखा गया है। हाल ही में, पंजाब की विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट-1988 के तहत उन्हें एक वर्ष की हिरासत में रखने का आदेश जारी किया है। पंजाब के गृह सचिव गुरकीरत कृपाल सिंह ने एसटीएफ की सिफारिश पर यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नए आदेश के अनुसार, भले ही पूर्व सरपंच को अपने खिलाफ चल रहे मामलों में जमानत मिल जाए, लेकिन वह एक साल तक एसटीएफ की निगरानी में रहेगा और जेल से बाहर नहीं आ सकेगा।

गुरदीप सिंह उर्फ रानों को हाल ही में कपूरथला की सेंट्रल जेल से बठिंडा जेल में स्थानांतरित किया गया है। इस संबंध में एसटीएफ के एआईजी स्नेहदीप शर्मा ने बताया कि यह कदम पंजाब में मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेष रूप से, हिरासत के दौरान रानों को केवल अपने परिवार से मिलने की अनुमति होगी और अधिकारियों द्वारा मुलाकातों का ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा, ताकि स्थिति पर पूरी निगरानी रखी जा सके।

गुरदीप सिंह उर्फ रानों को एसटीएफ ने 6 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ, जैसे कि 5.792 किलोग्राम हेरोइन, 400 ग्राम अफीम, और विभिन्न प्रकार की आग्नेयास्त्रों के साथ ही 12 लग्जरी कारें और 50.24 लाख रुपये की मादक पदार्थों की बिक्री से अर्जित राशि भी बरामद की गई थी। इसके बाद, गुरदीप और उसके साथियों के खिलाफ एसटीएफ ने मोहाली में विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर भी दर्ज की थी।

अधिकारियों के अनुसार, रानों की संपत्ति भी संदिग्ध गतिविधियों के कारण जब्त की गई है, जिसमें लगभग 7.80 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति शामिल है। जेल में रहते हुए, उसकी गतिविधियों को लेकर संदेह बढ़ता जा रहा था, क्योंकि वह कथित रूप से जेल से ही नशे के व्यापार को संचालित करने का प्रयास कर रहा था। इसी कारण एसटीएफ ने सरकार को एक पत्र लिखकर उसे हिरासत में लेने की आवश्यकता बताई थी।

जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि गुरदीप सिंह का संबंध अंतरराष्ट्रीय तस्करों, जैसे हरमिंदर सिंह उर्फ रोमी रंधवा, राजन शर्मा, तनवीर बेदी और बलजीत सिंह उर्फ बब्बू खेड़ा से भी था। यह सभी जानकारी राज्य के नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की गंभीरता को दर्शाती है। एसटीएफ का यह कदम न सिर्फ लुधियाना बल्कि पूरे पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या को रोकने में सहयोगी साबित हो सकता है।