सुखबीर बादल पर हमले के आरोपी को निकालने की मांग, SGPC करेगी जांच!

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की हालिया बैठक में नारायण सिंह चौड़ा द्वारा सुखबीर सिंह बादल पर किए गए हमले को लेकर गहरी चिंता जाहिर की गई है। बैठक के बाद एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मांग की है कि चौड़ा को पंथ से निकाल दिया जाए। धामी ने इस घटना को निंदनीय बताया और कहा कि यह श्री अकाल तख्त साहिब की तौहीन है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले के चलते संगत में भय का माहौल उत्पन्न हो गया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कमेटी के सदस्य जसवंत सिंह ने कहा है कि नारायण सिंह चौड़ा का जीवन संघर्ष से भरा रहा है, और यह जानना आवश्यक है कि उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया। उनके अनुसार, सीधे उसे पंथ से निकालने की मांग करना उचित नहीं है, और इस मुद्दे पर गहन विचार करने की आवश्यकता है। एसजीपीसी ने यह भी महसूस किया कि यह घटना एक छिपी हुई साजिश का नतीजा हो सकती है, इसलिए जांच का आदेश दिया गया है। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो तीन हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

एडवोकेट धामी ने संदर्भ में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि पुलिस का रवैया इस मामले में नकारात्मक रहा है। एक व्यक्ति जो बीस साल से सरकारी सेवा में था, उसकी सतर्कता के कारण ही घटना रोकी गई। फिर भी, सरकार इसे सिर्फ पुलिस की मुस्तैदी के रूप में दर्शा रही है। इससे साफ होता है कि SGPC अपने स्तर पर मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच कराना चाहती है।

बैठक से पहले, हरजिंदर सिंह धामी ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से भी मुलाकात की थी, जहां उन्होंने इस मामले की गंभीरता पर चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पंथिक मुद्दों पर विचार विमर्श करना और उचित निर्णय लेना था।

सुखबीर सिंह बादल की सजा के बारे में भी चर्चा चल रही है, जो 3 दिसंबर को गोल्डन टेंपल से शुरू हुई थी और 13 दिसंबर को समाप्त होगी। इसके तहत, श्री अकाल तख्त साहिब ने बादल और अन्य सदस्यों द्वारा दिए गए इस्तीफों को मंजूरी दी है। इसी बीच, अकाली दल ने श्री अकाल तख्त साहिब से समय मांगा था, जिसे स्वीकार किया गया है।

सुखबीर बादल पर प्रशासन की तरफ से चार प्रमुख आरोप लगाए गए हैं, जिनमें महत्वपूर्ण मामलों की अनदेखी और सिख पंथ के अनुशासन का उल्लंघन शामिल हैं। इनमें से प्रमुख है डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से संबंधित मामला, जिसमें बादल सरकार ने किसी प्रकार की सजा देने के बजाय शिकायत वापस ले ली। इसके अलावा, फर्जी मुठभेड़ों में सिख युवाओं की हत्या के मामले भी उठाए गए हैं, जो पंजाब के सामाजिक माहौल पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।

इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सिख पंथ की सुरक्षा और उनके अधिकारों का सही तरीके से संरक्षण किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं का पुनरावृत्ति न हो। एसजीपीसी द्वारा किए गए प्रस्ताव और जांच की आशा जनित है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।