लुधियाना में भाजपा संकट: दविंदर जग्गी का बगावत, टिकट न मिलने पर आजाद चुनाव की घोषणा!

लुधियाना नगर निगम चुनाव, जो 21 दिसंबर को निर्धारित है, हाल ही में राजनीतिक हलचल का केंद्र बना हुआ है। इस चुनाव से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अंदरूनी मतभेदों की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व पार्षद दविंदर जग्गी ने पार्टी को छोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने हलका प्रधान गुरदेव शर्मा देबी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी पक्षपातपूर्ण नीतियों के कारण उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।

दविंदर जग्गी ने अपने समर्थकों से कहा कि वे आगामी चुनाव में वार्ड नंबर 83 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने वार्ड नंबर 83 के लिए नमिता मल्होत्रा को उम्मीदवार बनाया था, जबकि जग्गी ने स्पष्ट किया कि उन्हें वार्ड 82 से बिना किसी औपचारिक आवेदन के टिकट दिया गया, जो कि उनके लिए अपमानजनक था। उन्होंने पार्टी के इस निर्णय पर असहमति जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी वार्ड 82 के लिए आवेदन नहीं किया था। इस प्रकार, पार्टी ने बिना किसी जमीनी सत्यापन के उन्हें टिकट देने का निर्णय लिया, जिससे उन्हें बहुत निराशा हुई।

जग्गी ने गुरदेव शर्मा देबी पर आरोप लगाया है कि वे अपने करीबी दोस्तों और जानकारों को लाभ पहुंचाने के लिए राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका यह कदम पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, क्योंकि वे निजी लाभ के लिए काम कर रहे हैं। जग्गी ने अपने वफादार समर्थकों को चुनाव की तैयारी करने के लिए भी प्रेरित किया, यह आश्वासन देते हुए कि उनके जमीनी काम की वजह से वे वार्ड नंबर 83 के लिए एक मजबूत उम्मीदवार हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से वार्ड नंबर 83 में उनका सक्रिय योगदान रहा है और इस आधार पर वे उस क्षेत्र के मतदाताओं का समर्थन प्राप्त करने में सक्षम हैं। जग्गी ने यह स्पष्ट किया कि वे केवल अपने लंबे समय के कार्यों के चलते ही इस वार्ड से चुनाव में भाग लेना चाहते हैं, न कि किसी अन्य वार्ड से। उनके विचार में, पार्टी में चल रही आंतरिक राजनीति ने उन्हें इस स्थिति में डाल दिया है, जिसमें उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भाग लेना पड़ रहा है।

इस तरह, लुधियाना में नगर निगम चुनाव के प्रति राजनीतिक दृष्टिकोण में नाटकीय बदलाव देखा जा रहा है। दविंदर जग्गी का भाजपा से बाहर निकलना और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी पहचान बनाना दर्शाता है कि कैसे स्थानीय राजनीति में आंतरिक मतभेद चुनावी प्रगति को प्रभावित कर सकते हैं। आगे의 घटनाक्रम यह तय करेगा कि क्या जग्गी अपने समर्थकों के साथ मिलकर वार्ड नंबर 83 से सफल होंगे या भाजपा की नीतियां फिर से नियंत्रण में आएंगी।