किसानों की लंबित मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किए गए आह्वान पर आज बरनाला की अनाज मंडी में केंद्र सरकार के खिलाफ एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में मौसम की अनुकूलता न होते हुए भी, बारिश के बीच हजारों किसानों ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई। इस धरने में प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां और मंजीत सिंह धनेर समेत कई prominent नेता विशेष तौर पर शामिल हुए। उन्होंने मीडिया के समक्ष केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए किसानों की समस्याओं को रेखांकित किया।
जोगिंदर सिंह उगराहां ने बयान दिया कि आज का यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा लाए गए मंडीकरण संबंधी ड्राफ्ट के खिलाफ है। उनके अनुसार, यह ड्राफ्ट मूलतः उन तीन कृषि कानूनों को पुनः लागू करने की चाल है, जिन्हें पहले किसानों के दबाव में रद्द किया गया था। किसान नेता मंजीत सिंह धनेर ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पहले से ही सरकार के साथ साझा की जा चुकी हैं, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा अभी तक किसी गंभीर कार्रवाई का आश्वासन नहीं मिला है।
उन्होंनें यह भी कहा कि शंभू बॉर्डर पर किसानों का संघर्ष जारी है और वहां सरकार ने किसानों के खिलाफ जुल्म-ओ-सितम बढ़ा दिए हैं। इस दौरान अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में उनके साथियों की ज्ञापनों की मांगों को नज़रअंदाज़ करना भी सरकार की एक बड़ी चूक मानी जा रही है। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को न माना जाता, वे संघर्ष जारी रखेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से यह भी बताया गया कि पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों की कल बैठक होगी, जिसमें अगली कार्रवाई के बारे में चर्चा की जाएगी। इस बीच, किसान आंदोलन की निरंतरता के लिए सभी संगठनों ने आपसी सहयोग की प्रतिबद्धता जाहिर की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न केवल अपनी मांगों को पूरा करना है, बल्कि एक स्थायी समाधान के लिए सरकार को बाध्य करना भी है।
इस अभिनव पहल से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि किसान संगठनों का एकजुटता और दृढ़ता उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों की यह लड़ाई केवल आर्थिक उपायों को ही नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की भी है। इनके संघर्ष को देखते हुए, यह संभावना बढ़ रही है कि जब भी जनहित में निर्णय नहीं होगा, किसान संगठनों का प्रदर्शन और भी तेज हो सकता है।