जालंधर में कांग्रेस पार्षद AAP में शामिल, पूर्व मेयर की पत्नी को हरा कर मचा तहलका!

जालंधर नगर निगम में मेयर पद को अपने नाम करने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अपनी रणनीतियों में जुट गए हैं। हाल ही में पूर्व मेयर जगदीश राज राजा की पत्नी अनीता राजा को हराकर वार्ड नंबर 65 की पार्षद प्रवीण वासन ने आप पार्टी का दामन थाम लिया है। इसके साथ ही एक और निर्दलीय पार्षद सीमा रानी ने भी आप में शामिल होने का निर्णय लिया है। इससे आप को एक नई ऊर्जा मिली है, लेकिन उसके बावजूद भी पार्टी को अभी भी दो पार्षदों की आवश्यकता है ताकि वह बहुमत हासिल कर सके।

आप नेता, जिसमें मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, मंत्री रवजोत सिंह और मंत्री मोहिंदर भगत शामिल हैं, इस समय बाकी पार्षदों को मनाने में व्यस्त हैं। मंत्री ईटीओ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से इस बात की जानकारी देते हुए दो नए सदस्यों को पार्टी में शामिल करने की खुशी मनाई। अब आप को बहुमत प्राप्त करने के लिए करीब पांच और पार्षदों की आवश्यकता है, जिसके लिए पार्टी को निर्दलीय उम्मीदवारों और विपक्ष पर निर्भर रहना पड़ सकता है। यह स्थिति तब बनी है जब विपक्ष सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए समर्थन मांग सकता है।

आप पार्टी ने नगर निगम में 38 सीटें जीतने के बाद मंथन शुरू किया है कि किस प्रकार से वे मेयर का चुनाव कर सकते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और अन्य मंत्री जालंधर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार कर चुके हैं और जनता से कई वादे किए हैं, लेकिन चुनाव परिणामों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ज़मीन पर काम करने वाले मंत्री मान, अरोड़ा, ईटीओ और भगत मिलकर भी बहुमत का आंकड़ा पार करने में असफल रहे हैं, जिसके चलते पार्टी को विपक्ष के समर्थन की आवश्यकता महसूस हो रही है।

इस कठिन परिस्थिति में, मोहिंदर भगत ने अपने क्षेत्र में 10 सीटें जीतने में सफल रहे, जो कि पार्टी के लिए एक सकारात्मक संकेत है। अब देखना यह है कि अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों और विपक्ष को कैसे साधा जाता है ताकि आप पार्टी अपने नाम पर मेयर का चुनाव कर सके। राजनीतिक समीकरणों और सहयोगों के माध्यम से करोबे में टिके रहने की चुनौती सत्तारूढ़ दल के लिए बड़ी है, और यह पूरी स्थिति आगामी दिनों में और अधिक रोमांचक हो सकती है।

आप पार्टी के लिए यह समय निर्णायक है, क्योंकि यदि वे जल्दी ही सही कदम उठाने में असफल होते हैं, तो उनकी मेयर की कुर्सी की उम्मीदें धूमिल हो सकती हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नज़र अब इस दिशा में है कि कैसे आप पार्टी अपने रणनीतिक प्रयासों के माध्यम से बहुमत को हासिल कर पाने में सफल होगी।