खन्ना में कांग्रेस पार्टी ने सांसद डॉ. अमर सिंह और पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली के नेतृत्व में एक रोष मार्च आयोजित किया। इस मौके पर उन्होंने उप आयोगक शिखा भगत को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का अपमान किया है। कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि अमित शाह को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। यह रोष मार्च अंबेडकर भवन से शुरू होकर जीटी रोड होते हुए एडीसी कार्यालय तक पहुंचा। इस प्रदर्शन में खन्ना, पायल और समराला से आए कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार तथा अमित शाह के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
सांसद डॉ. अमर सिंह ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद में बाबा साहेब के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणियों ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया है। उनका कहना है कि जो लोग भारतीय संविधान में परिवर्तन करने का ख्याल रखते हैं, वे बाबा साहेब के प्रति इस तरह का अपमान सहन नहीं कर सकते। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को हर घर तक पहुंचाएगी और बदलाव की माँग करेगी। डॉ. सिंह ने केंद्रीय मंत्री से तात्कालिक माफी मांगने की मांग की और कहा कि उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमित शाह का बयान भाजपा की असली मानसिकता को उजागर करता है। कांग्रेस ने हमेशा यह कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह संविधान को बदलने का इरादा रखते हैं। चुनावों के दौरान दिया गया 400 पार का नारा भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कोटली का कहना था कि अमित शाह की यह कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के लिए है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस प्रदर्शन में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी था कि कांग्रेसी नेताओं ने बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी आवाज को नजरअंदाज किया गया, तो वे और भी सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। इस दौर में दलित समुदाय के उत्थान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक ठोस योजना बनाने का संकल्प लिया।
कुल मिलाकर, खन्ना में आयोजित ये रोष प्रदर्शन ना केवल अमित शाह के बयान के खिलाफ था, बल्कि यह एक बड़ा संदेश भी था कि कांग्रेस पार्टी संविधान और उसके निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर के सम्मान के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उनकी मंशा है कि इस मुद्दे को राजनीतिक मंच पर लाकर एक व्यापक चर्चा का हिस्सा बनाया जाए ताकि नागरिक अधिकार और सामाजिक न्याय की बात को आगे बढ़ाया जा सके।