शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल के इस्तीफे के संबंध में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के तहत पार्टी जल्द ही एक निर्णय लेने जा रही है। डॉ. दलजीत सिंह चीमा, जो अकाली दल के प्रवक्ता और सीनियर लीडर हैं, ने इस मुद्दे पर एक इंटरव्यू में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी की बैठक जनवरी के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी। सुखबीर बादल के इस्तीफे का कारण बताते हुए, डॉ. चीमा ने कहा कि वह चाहते थे कि उनके इस्तीफे के बाद एक नया चुनाव हो, ताकि अकाली दल का नया प्रधान चुना जा सके।
श्री अकाल तख्त साहिब ने अकाली दल की कोर कमेटी को इस विषय पर फैसला लेने का निर्देश दिया है और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की भी मांग की है। इसके चलते पार्टी की बैठक जल्द ही होने वाली है, जहां यह तय किया जाएगा कि क्या सुखबीर बादल का इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा या फिर इस पर कोई और चर्चा की जाएगी। दो दिसंबर को हुई बैठक में पांच सिख साहिबों ने यह निर्णय लिया था कि तीन दिनों के अंदर कोर कमेटी के सभी सदस्य अपने इस्तीफों को जांचें और रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपें। इस पर अकाली दल ने सुखबीर बादल और अन्य सदस्यों के लिए समय मांगा था, और अकाल तख्त ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।
सुखबीर बादल की सरकार को कई गंभीर मामलों में सजा मिली है। इनमें से प्रमुख हैं- 2007 में सलाबतपुरा के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ की गई शिकायत को वापस लेना, और राम रहीम को माफी दिलवाना। इसके अलावा, बादल सरकार ने बेअदबी की घटनाओं की जांच को सही ढंग से नहीं किया, जिससे सिख समुदाय में भारी आक्रोश फैला। 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं ने पंजाब में गंभीर स्थिति उत्पन्न कर दी थी।
न केवल बेअदबी के मामलों में, बल्कि सिख युवाओं की हत्या के झूठे मामलों में भी अकाली दल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। पूर्व DGP सुमेध सैनी की नियुक्ति और फर्जी मुठभेड़ों ने पार्टी की छवि को धूमिल किया है। इसी तरह, डेरा मुखी राम रहीम को दी गई माफी के बाद अकाली दल द्वारा विज्ञापनों में अरबों रुपए खर्च किए जाने के मामले ने भी पार्टी की कठिनाइयों को बढ़ाया है।
इन सभी घटनाओं के मद्देनजर, पार्टी ने बलविंदर सिंह भूंदड़ को कार्यकारी प्रधान नियुक्त किया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि शिरोमणि अकाली दल अपनी आंतरिक और बाह्य चुनौतियों को लेकर गंभीर है और वह आने वाले समय में एक नई दिशा को अपनाने के लिए तैयार है।