अमृतसर कांग्रेस पार्षदों में बंटवारा: मेयर चुनाव में देरी की आशंका!

पंजाब के अमृतसर में मेयर पद की दौड़ में कांग्रेस पार्टी अब जोड़-तोड़ में जुट गई है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 40 पार्षद हैं, लेकिन निगम हाउस में बहुमत के लिए उन्हें 46 पार्षदों का समर्थन जुटाना आवश्यक है। यदि कांग्रेस इस आंकड़े को हासिल नहीं कर पाती, तो निगम हाउस में मतदान करवाना पड़ेगा। इस संख्या को छूने के लिए कांग्रेस आजाद पार्षदों की ओर नजरें गड़ाए हुए है। पार्टी के सीनियर नेता लगातार उच्च कमान से संपर्क साध रहे हैं ताकि मेयर पद के लिए कोई ठोस फैसला लिया जा सके।

इस बीच, कांग्रेस पार्टी के अंदर की आंतरिक कलह भी मेयर चुनाव में देरी का एक प्रमुख कारण बन रही है। पार्टी के पार्षद दो अलग-अलग गुटों में बंट गए हैं। एक गुट ओम प्रकाश सोनी के साथ है, जबकि दूसरा गुट एंटी सोनी के नाम से जाना जाता है। सोनी गुट की कोशिश है कि ओम प्रकाश सोनी के भतीजे विकास सोनी के नाम पर मुहर लग सके, जबकि एंटी गुट इस नाम के खिलाफ हैं। दोनों गुटों ने अब तक अपनी स्थिति को हाई-कमांड के सामने प्रस्तुत कर दिया है, और अब निर्णय उच्च कमान के स्तर पर ही होगा।

निगम चुनाव के बाद, सभी चुने हुए पार्षदों को एक महीने के भीतर शपथ लेने की प्रक्रिया के तहत सर्टिफिकेट मिलेगा। इसके उपरांत, डिविजनल कमिश्नर जालंधर रेंज निगम कमिश्नर को पत्र जारी कर बैठक की तारीख तय करेगा। उस दिन शपथ ग्रहण समारोह होगा और यदि राजनीतिक पार्टियों के बीच सहमति बनी, तो मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव भी उसी दिन किए जा सकते हैं। हालाँकि, इस बार किसी भी पार्टी का बहुमत नहीं होने के कारण, चुनाव की अगली मीटिंग की तारीख शपथ ग्रहण समारोह के बाद तय की जाएगी।

अमृतसर नगर निगम हाउस में किसी एक पार्टी के पास बहुमत न होने के कारण मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव बैलेट पेपर के जरिए संपन्न किया जाएगा। इस बार, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव नियम 1991 के अनुसार, चुनाव दौरान केवल वही सदस्य वोट डाल सकते हैं जो निगम हाउस में मौजूद होंगे।

अब देखना यह होगा कि अमृतसर में चुनावी स्थिति में आगे क्या विकास होते हैं और कौन सी पार्टी अपने प्रत्याशी को विजय दिलाने में सफल होती है। इस प्रक्रिया में पार्षदों की सक्रियता और गठबंधन बनाने की काबिलियत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नगर निगम चुनाव की गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई देने लगी है, जिससे हर किसी की नजरें इस चुनाव पर टिकी हुई हैं।