डॉ. मनमोहन सिंह, जो दो बार भारत के प्रधानमंत्री रह चुके हैं, का निधन गुरुवार रात को 92 वर्ष की उम्र में हो गया। उनकी उपलब्धियों और प्रभाव को देखते हुए उनकी मृत्यु एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। मनमोहन सिंह का चंडीगढ़ से गहरा संबंध रहा है, जहां उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा प्राप्त की थी। 1952 में इकोनॉमिक्स में बैचलर डिग्री और 1954 में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद, वे इस विश्वविद्यालय में सीनियर फैकल्टी के रूप में कार्यरत रहे। उनके योगदान को याद करते हुए विश्वविद्यालय ने उनकी लाइब्रेरी और छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण कमरे को सहेज कर रखा है।
मनमोहन सिंह की चंडीगढ़ स्थित कोठी संख्या 727 है, जहां अब कोई निवास नहीं करता। हालांकि, उनकी यादों को संजोने के लिए एक केयरटेकर नियुक्त किया गया है। उनके करीबी दोस्त हंसराज, जो उनके साथ अमृतसर के हिंदू कॉलेज में पढ़े थे, बताते हैं कि मनमोहन सिंह हमेशा दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं। भले ही वह विदेश में रहे, लेकिन उन्होंने अपनी जड़ों को कभी नहीं भुलाया। वे क्लास के दौरान कठिन सवालों का हल निकालने में सबसे आगे रहते थे, और जब अमेरिका लौटने के बाद वह अचानक उनसे मिले, तो उन्होंने नाम से उन्हें पहचानकर सभी को चौंका दिया।
उनकी कोठी की देखभाल कर रहे केयरटेकर आनंद सिंह बिष्ट ने कहा कि उनकी मृत्यु की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने मनमोहन सिंह की उदारता को भी याद किया, जब वह अपनी सरकारी तनख्वाह का एक हिस्सा दान कर दिया करते थे। इस समय, टीम ने पंजाब यूनिवर्सिटी में जाकर मनमोहन सिंह से जुड़ी यादों को ताजा करने का प्रयास किया, जहां शिक्षकों ने उनके योगदान और नेतृत्व को याद किया।
पंजाब यूनिवर्सिटी में, इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर्स ने बताया कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान देश में जो आर्थिक सुधार हुए, वे उनके ही नेतृत्व में संभव हुए थे। विश्वविद्यालय में उनकी याद में एक कमरा स्थापित किया गया है, जहां उनकी कुर्सी और उनकी तस्वीरें हैं। उनके योगदान को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि मनमोहन सिंह ने न केवल राजनीति में, बल्कि शिक्षाविदों में भी एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
अंत में, होमी भाभा कैंसर अस्पताल के निदेशक आशीष गुलिया ने भी मनमोहन सिंह की उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने इस अस्पताल की नींव रखी थी, जो अब क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है। इस अस्पताल में पिछले वर्ष 18,000 से अधिक नए कैंसर मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो मनमोहन सिंह के दृष्टिकोण और कार्यों का प्रतीक है। उनके योगदान और उनकी अनमोल यादों को सहेजने का कार्य अब हम सभी को आगे बढ़ाना है।