जालंधर: दबाव में गर्भवती परिजनों के साथ ससुराल के खिलाफ बगावत! लड़की न पैदा करने का आरोप।

जालंधर के कोट सदीक मोहल्ले में एक परिवार ने अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए संस्था के साथ मिलकर प्रदर्शन किया। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की। परिवार ने यह आरोप लगाया है कि ससुराल वाले उनकी बेटी को लगातार परेशान कर रहे हैं। पीड़िता रजनीश रानी ने बताया कि उनकी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी, लेकिन शादी के छह महीने बाद ही ससुराल वालों ने उन्हें प्रति दहेज की मांग करना शुरू कर दिया।

रजनीश ने खुलासा किया कि जब वह गर्भवती हुईं, तब परेशानी और बढ़ गई। उन्होंने कहा, “मेरे सास-ससुर मुझे दहेज के लिए परेशान कर रहे थे। जब मैं pregnant हो गई, तो उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें लड़की नहीं, लड़का चाहिए।” रजनीश ने बताया कि उन्हें कमरे में बंद करके रखा जाता था और धमकी दी जाती थी कि यदि वे उनकी इच्छाओं की पूर्ति नहीं करेंगी, तो उनके बेटे की दूसरी शादी कर दी जाएगी। वह पिछले पांच महीने से अपने मायके में रह रही हैं, क्योंकि उन्हें अपने ससुराल के माहौल से डर लगने लगा था।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी बरजिंदर सिंह ने बयान दिया कि परिवार की ओर से महिला सेल में शिकायत दर्ज करवाई गई है, जो कि अभी भी जांच के अधीन है। एसीपी ने कहा, “हमने परिवार से बातचीत की है और वे यहां इकट्ठा हुए थे ताकि उनकी बातों को सुना जा सके। जाँच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” पहले इस मामले की जांच डिवीजन नंबर-7 द्वारा की जा रही थी, लेकिन बाद में यह केस महिला सेल को सौंप दिया गया।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि दहेज प्रथा अभी भी समाज में एक बड़ा मुद्दा है, जिसने ना केवल रजनीश की जिंदगी को प्रभावित किया है, बल्कि उनके परिवार को भी मानसिक तनाव में डाल दिया है। महिलाओं के विरुद्ध ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस प्रकार की घटनाएं समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को दिखाती हैं ताकि ऐसी दिक्कतों का सामना कर रही महिलाओं को सहायता मिल सके।

जालंधर में इस मामले की पृष्ठभूमि को जानकर यह भी समझा जा सकता है कि समाज में महिलाओं को खुद को और अपने अधिकारों को लेकर सचेत रहना होगा। ये केवल व्यक्तिगत मामले नहीं होते, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक बदलाव का हिस्सा बनने का समय है। समाज को दहेज प्रथा और इससे जुड़े सभी प्रकार के अत्याचारों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़नी चाहिए, ताकि भविष्य में और भी महिलाएं इस प्रकार की हिंसा का सामना ना करें।