लुधियाना में मेयर पद पर तकरार: 48 घंटों में होगा बड़ा राजनीतिक उलटफेर!

पंजाब के लुधियाना में मेयर की कुर्सी की प्रतिस्पर्धा को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो गई हैं। हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस के पार्षद जगदीश लाल दीशा, शिअद के पार्षद चतरवीर और एक आजाद उम्मीदवार दीपा रानी को अपने दल में शामिल किया है। मेयर पद के चुनाव के लिए सभी पार्टियों को बिना विधायकों के मतदान करवाए 48 सीटों की आवश्यकता होगी। इस समय आम आदमी पार्टी के पास 44 सीटें हैं और उनकी पार्टी के विधायक आगामी चुनाव को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि वे जल्द ही मेयर का ऐलान कर देंगे।

इस बीच, कांग्रेस के जिला प्रधान और पूर्व विधायक संजय तलवाड़ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करके संपूर्ण शहर की राजनीतिक स्थिति को और भी गर्मा दिया है। तलवाड़ ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि विरोधियों को अधिक खुश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अभी बहुत कुछ होना बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि शहर की राजनीति में आगामी दो दिनों के भीतर बड़े परिवर्तन आ सकते हैं। तलवाड़ का मानना है कि आम आदमी पार्टी ने यदि पंजाब में बहुमत हासिल किया है, तो उन्हें लुधियाना में 62 या 62 से अधिक सीटें प्राप्त होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस जल्द ही मेयर कुर्सी को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करेगी और विपक्ष को सावधान रहना चाहिए।

भाजपा और कांग्रेस के बीच संभावित सहयोग को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस पर स्पष्ट शब्दों में रोक लगा दी। उन्होंने कांग्रेस मुक्त भारत के अपने अभियान का हवाला देते हुए कहा कि वे कांग्रेस के साथ किसी भी प्रकार का गठजोड़ नहीं कर सकते। इस निकाय चुनाव में भाजपा के पास 19 सीटें हैं, जबकि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के पास केवल 1 सीट है, साथ ही कुछ आज़ाद उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।

लुधियाना की मेयर कुर्सी के लिए राजनीतिक दलों के बीच की यह कवायद साफ दर्शाती है कि कैसे लोकल चुनाव स्तर पर राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। सभी दल जिस प्रकार से एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में लुधियाना की राजनीति में काफी हलचल होने वाली है। राजनीतिक आंदोलनों में तेजी और परस्पर प्रतिस्पर्धा इस बात का संकेत है कि दलों के बीच की यह जंग केवल मेयर की कुर्सी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में अपनी राजनीतिक ताकत को साबित करने के लिए भी महत्व रखती है।

इस प्रकार, लुधियाना में मेयर चुनाव को लेकर की जा रही राजनीति ने सभी दलों के लिए चुनौतियों और संभावनाओं का एक नया अध्याय खोला है, जिससे आने वाले चुनावों में कई आश्चर्यजनक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। सबकी नजरें अब इस मोड़ पर टिकी हुई हैं कि कौन सी पार्टी इस राजनीतिक दौड़ में बाजी मारेगी।