## सिख धर्मगुरु गोविंद सिंह के साहिब जादों, जोरावर और साहिब फतेह सिंह की वीरता की कहानी मध्यप्रदेश के बच्चों को पढ़ाई जाएगी।
यह कहानी उनके अदम्य साहस और धर्म के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।
मुगल शासन की तख्त पर यह गाथा मुगल बादशाह द्वारा जोरावर और साहिब फतेह सिंह को बंदी बना लिया जाता है। बादशाह एक धर्म परिवर्तन की शर्त के साथ उन्हें मदद व स्वतंत्रता का वादा करता है, लेकिन दोनों साहिबजादे दृढ़ हैं। वे अईत के डर से कभी धर्म परिवर्तन नहीं करने के लिए तैयार होते हैं। “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के नारों का जयकारा लगाते हुए, वे मुगल बादशाह के दबाव को अस्वीकार कर देते हैं।
धीरज और धैर्य देखते हुए मुगल बादशाह उनके दोनो साहिबजादों को दीवारों में चुनवाने का फैसला करता है, लेकिन इन दो वीर लड़कों को यहाँ से भी बचने या शायद किसी पवित्र शक्ति से बचने का माध्यम मिल जाता है। इससे नाराज मुगल बादशाह उनके सिर कलम कर देते हैं।
धर्मगुरु गोविंद सिंह का बुरहानपुर से गहरा नाता रहा है।
1708 ईस्वी में दक्षिण यात्रा के दौरान, वह यहाँ 20 दिन रुकते हैं। उन्होंने यहाँ सुनहरी बीड़ यानी गुरूग्रंथ साहिब का निर्माण कराया और उसमें स्वर्ण हस्ताक्षर कर “सतनाम श्री वाहे गुरू” लिखा। हर साल प्रकाश पर्व पर केवल एक बार बीड़ साहिब के दर्शन कराए जाते हैं। गुरुद्वारा में गुरु गोविंद सिंह जी के 4 संहिबजाड़े की फोटो लगी है। दुनिया भर से सिख समाज यहाँ आते हैं और उन्हें नमन करते हैं।
वीर बाल दिवस, उनकी शहादत को याद करने के लिए 26 नवंबर 2022 से मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी शुरुआत की और भारतीय जनता पार्टी ने गुरुद्वारों में पहुँचकर भी वीर बाल दिवस मनाया गया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि इसे शीघ्र ही मध्यप्रदेश पाठयपुस्तक निगम की किताब में शामिल किया जाएगा।
**ज्ञान चरण सिंह के अनुसार:** धर्मगुरु गोविंदसिंह जी ने सिखों के जत्थे बनाकर अपने बेटों को जंग पर भेजा था। अजीत सिंह, जूझार सिंह को अपने हाथों से तैयार किया था। एक बेटा शहीद हुआ तो दूसरे बेटे को भी तैयार करके पगड़ी सजाकर भेजा।
दो साहिबजादे जोरावर सिंह, फतेह सिंह को धर्म परिवर्तन के लिए झिझकते हुए प्रेरित किया गया, लेकिन वह लालच में नहीं आए। उन्हें ब्रुज में रखा गया और उन्हें दीवार में चुनने का फतवा दिया गया। दो बार दीवार गिर गई तब उनकी शीश कलम कर दी गई।
**यह कहानी बुरहानपुर शहर को भी महत्वपूर्ण बनाती है:**
महाराष्ट्र सीमा से लगे मध्यप्रदेश का बुरहानपुर, सिख समाज के लिए ऐतिहासिक है।
इसे पहले गुरु श्री गुरुनानक देवजी और दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह जी महाराज आए थे। आज भी यह शहर सिखों का धार्मिक स्थल गुरुद्वारा बड़ी संगत और राजघाट का ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। श्री गुरुनानक देवजी ने बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे ठहरे थे और यहां लगभग 450 साल पुराना ऐतिहासिक गुरुद्वारा है।