जालंधर की हरसीरत ने जीता जूनियर मिस इंडिया खिताब, गुजरात की प्रियांशा दूसरे स्थान पर!

जालंधर की एक होशियार छात्रा हरसीरत कौर ने जूनियर मिस इंडिया प्रतियोगिता में बाजी मारकर सभी को गर्वित कर दिया है। केवल 8 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए आयोजित इस प्रतियोगिता में हरसीरत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वे स्थानीय एक प्राइवेट स्कूल की छात्रा हैं। प्रतियोगिता में जश्न मनाने का कारण बनते हुए, हरसीरत ने देशभर से आए 120 प्रतिभागियों के बीच उत्कृष्टता दिखाई। प्रतियोगिता में गुजरात की प्रियांशा चाहंदे ने दूसरा और सुंदरगढ़ की सनम कराली ने तीसरा स्थान हासिल किया।

हरसीरत के माता-पिता, गुर इकबाल सिंह और नीलू ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनकी बेटी का यह सफर आसान नहीं था। पढ़ाई के साथ-साथ मॉडलिंग करियर पर ध्यान केंद्रित करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हरसीरत ने अपनी मेहनत और लगन से यह खिताब अपने नाम किया। पिता ने कहा, “हमारी बेटी ने दोनों ही क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। वह हमेशा से डॉक्टर बनने का सपना देखती रही है, और उसके इस अदम्य साहस ने हमें बेहद गर्वित किया है।”

हरसीरत ने पिछले वर्ष साक्षात्कार देने के बाद जूनियर मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के लिए भी प्रयास किया था, लेकिन उस बार उनका चयन नहीं हो पाया था। इस वर्ष, अगस्त महीने में पंजाब के लुधियाना में आयोजित ऑडिशन में उनका चयन हुआ। फाइनल प्रतियोगिता में उनकी जीत से यह सिद्ध होता है कि उन्होंने अपनी मेहनत का फल प्राप्त किया है।

यह प्रतियोगिता जूनियर मिस इंडिया द्वारा आयोजित की गई थी, जो हर साल 5 से 15 साल के बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करती है। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चों को रैंप वाकिंग और अन्य कौशल सीखना आवश्यक होता है। बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है और सफलतापूर्वक नामांकित बच्चों में से सर्वश्रेष्ठ को चुना जाता है। यह एक प्लेटफार्म है जहाँ युवा प्रतिभाएँ अपने कौशल को प्रदर्शित कर सकती हैं और अपने सपनों की ओर कदम बढ़ा सकती हैं।

हरसीरत कौर की सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समुदाय को गर्वित किया है। उनके प्रयास और मेहनत यह दिखाती है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो कोई सपना बड़ा नहीं होता। उनका यह अनुभव अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन सकता है कि उन्हें भी अपने शौक और शिक्षा दोनों को समान रूप से महत्व देना चाहिए। इस प्रकार, हरसीरत ने साबित किया है कि युवा प्रतिभाएँ अगर सही मार्गदर्शन और अवसर प्राप्त करें, तो वे निश्चित रूप से अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती हैं।