खलबली! SKM ने पंजाब महापंचायत का समर्थन किया, खनौरी बॉर्डर पर जुटेंगे किसान

आज पंजाब के मोगा जिले में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की बड़ी महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस महापंचायत में सभी किसान संगठनों ने सहमति जताई कि वे शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन एकजुटता के साथ करेंगे। महापंचायत में पेश किए गए प्रस्ताव पर सभी यूनियनों के नेताओं ने मिलकर विचार किया, जो सभी किसानों के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है। यह पहली बार होगा जब SKM और अन्य किसान यूनियनें इस आंदोलन में साझेदारी करेंगी, जबकि इससे पहले लगभग 11 महीने से सिर्फ जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवण सिंह पंधेर ही मोर्चा संभाले हुए थे।

इस महापंचायत के बाद अगला कदम 13 जनवरी को तहसील स्तर पर केंद्र की कृषि मार्केटिंग नीति के ड्राफ्ट की कॉपियों को जलाने का है। इसके अलावा, 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने की योजना भी बनाई गई है। किसान नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि आंदोलन के खिलाफ किसी भी प्रकार की बयानबाजी नहीं की जाएगी और सरकार की मांगों को मनवाने के लिए एकजुट प्रयास किए जाएंगे। किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां के अनुसार, यह जरूरी है कि किसान अपनी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखें।

महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब की विभिन्न किसान जत्थेबंदियां एकजुट हो जाती हैं, तो इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा। टिकैत का मानना है कि आंदोलन को उन राज्यों में ले जाना होगा, जहां भाजपा की सरकार है, ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि सरकार SKM को तोड़ने का प्रयास कर रही है और नए किसान संगठनों का गठन कर रही है, जो सरकारी नीतियों के पक्ष में हैं।

वहीं, किसान नेता रमिंदर पटियाला ने बताया कि आगामी 6 मेंबर कमेटी 101 लोगों के जत्थे के साथ खनौरी जाएगी, जहां वे महापंचायत में पास किए गए प्रस्ताव को आगे बढ़ाएंगे। 15 जनवरी को इस मुद्दे पर पटियाला के गुरद्वारा दुख निवारण में बैठक का आयोजन किया जाएगा। यहां पर आगे की रणनीति और आंदोलन को एकजुटता के साथ चलाने के उपायों पर चर्चा होगी। महापंचायत में सभी नेताओं ने सर्वसम्मति से यह तय किया कि कोई भी नेता बयानबाजी करने से बचेगा, ताकि किसानों के मुद्दे को सही तरीके से उठाया जा सके।

इस समय, किसान आंदोलन के पीछे कई जटिलताएं हैं। पिछले कुछ समय में हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर किसान संघर्ष कर रहे हैं। हाल के दिनों में कुछ दुखद घटनाएं भी हुई हैं, जैसे कि एक किसान का आत्महत्या करना। यह सभी घटनाएं दर्शाती हैं कि आंदोलन की स्थिति कितनी गंभीर है। किसान नेताओं का मानना है कि एकजुटता के साथ और ठोस कदम उठाने से ही उनके मुद्दे का समाधान होगा। इस पर सभी किसानों को एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाना होगा।