अमृतसर में मेयर पद के लिए कांग्रेस के सीनियर नेताओं की आज एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग, पार्टी के ऑब्जर्वर हरीश चौधरी, विपक्ष के नेता प्रताप बाजवा, और पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा के अलावा कई अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस को मेयर के पद पर चुनाव जीतने के लिए 46 पार्षदों का समर्थन हासिल करना आवश्यक है, जबकि वर्तमान में पार्टी के पास केवल 41 पार्षद हैं। बीते कुछ दिनों में इस मुद्दे पर चार अलग-अलग बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनमें से पहली बैठक में केवल एक गुट के पार्षद मौजूद थे।
दूसरी बैठक अमृतसर देहाती कार्यालय में हुई, जहाँ राजा वडिंग ने कांग्रेस के भीतर एकता बनाए रखने का संदेश दिया। इसमें स्थानीय नेताओं जैसे जुगल किशोर शर्मा, ओम प्रकाश सोनी, अश्वनी पप्पू, सुनील दत्ती, दिनेश बस्सी, इंद्रबीर सिंह बुलारिया, और डॉ. नवजोत कौर ने भी भाग लिया। तीसरी बैठक को गोपनीय रखा गया, जिसमें मीडिया को प्रवेश नहीं दिया गया। वर्तमान में बैठक लगातार चल रही है, और मेयर पद के लिए अंतिम नाम पर निर्णय लेने की प्रक्रिया जारी है। कांग्रेस के भीतर गुटबाजी की आशंका के चलते नाम का खुलासा नहीं किया जा रहा है, ताकि पार्टी का एकता का संदेश न बिगड़ सके।
कांग्रेस का ग्राफ पिछले कुछ वर्षों से कमजोर रहा था, लेकिन अब जब पार्टी अपने प्रदर्शन में सुधार कर रही है, तो गुटबाज़ी की समस्या इसे फिर से कमजोर कर सकती है। इसी कारण कांग्रेस ने मेयर के चयन के लिए सीनियर नेता हरीश चौधरी को ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किया है। हरीश चौधरी पिछले तीन दिनों से अमृतसर में हैं और विभिन्न नेताओं के सुझाव ले रहे हैं।
दूसरी ओर, नगर निगम चुनावों में दूसरी पंक्ति में रही आम आदमी पार्टी (आप) की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। इस पार्टी ने 24 सीटें जीती थीं और व विधायक मिलाकर कुल 30 सीटों तक पहुँच गई थी। अब चार और पार्षदों को पार्टी में शामिल किया गया है, जिससे उनकी संख्या 34 पार्षदों तक पहुँच गई है। इसके अलावा, एक बीजेपी पार्षद भी पार्टी में शामिल हो चुकी हैं, जिससे आम आदमी पार्टी के पास अब कुल 35 सीटें हैं।
इस स्थिति को देखते हुए, आम आदमी पार्टी अन्य पार्षदों को अपने साथ जोड़ने के प्रयास कर रही है। यह राजनीतिक समीकरण अमृतसर के नगर निगम चुनाव में और अधिक रोचक बना रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस अपने पार्षदों के समर्थन को कैसे एकजुट करती है और क्या आम आदमी पार्टी इस चुनाव में अपनी स्थिति को और मजबूत कर पाएगी।