लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर और नगर निगम कमिश्नर को केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हाल ही में कड़ी चेतावनी दी है। यह चेतावनी मुल्लांपुर दाखा के हसनपुर गांव में एक हफ्ते के भीतर दो नवजात शिशुओं के साथ हुई घटनाओं के संदर्भ में दी गई है, जहां आवारा कुत्तों ने निर्दयतापूर्वक बच्चों पर हमला कर उनकी जान ले ली। मंत्री बिट्टू ने इस घटना की सूचना अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही पर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “एक और मासूम की जान चली गई। अब सवाल उठता है कि आपकी असावधानी के चलते और कितने लोग जान गंवाएंगे? यदि आप इन घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए शीघ्र कार्यवाही नहीं करते हैं, तो मुझे मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ेगी।”
हसनपुर गांव के स्थानीय निवासियों ने भी इस गंभीर समस्या के खिलाफ आवाज उठाई है। पिछले एक सप्ताह में आवारा कुत्तों के हमलों के चलते दो बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं। ग्रामीणों ने मिलकर कुत्तों को पकड़ने के लिए आपस में समूह बनाए हैं, और चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे पकड़े गए कुत्तों को मिनी सचिवालय में छोड़ देंगे। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो गई है जब ग्रामीण इलाकों में पिटबुल जैसे हिंसक कुत्ते छोड़ दिए गए हैं, जिसके चलते सुरक्षा के प्रति डर और बढ़ गया है।
जागरूक नागरिक और भारतीय किसान यूनियन के सदस्य जगरूप सिंह ने बताया कि अधिकारियों ने उनकी मांगों को अनसुना कर दिया है और अब गांववाले निरंतर भयभीत हैं। उन्होंने अति संवेदनशील घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “अगर अब भी कोई कदम नहीं उठाया गया, तो हम इन कुत्तों को मिनी सचिवालय ले जाकर अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।” इससे पहले, एक छोटे किसान के 11 वर्षीय बेटे पर शनिवार को कुत्तों के झुंड ने हमला किया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने लुधियाना-फ़िरोज़पुर रोड को बंद कर दिया। पुलिस ने आक्रोशित प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन धरातल पर स्थिति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया।
किसान संगठनों का कहना है कि ग्रामीणों को कुत्तों को पकड़ने में कोई सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार सुबह हसनपुर गांव में एक बच्चा कुत्तों के हमले का शिकार हुआ और इससे पहले 5 जनवरी को भी इसी तरह की एक घटना में एक अन्य बच्चा मारा गया था। इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और लुधियाना नगर निगम आयुक्त एवं डिप्टी कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट आगामी 4 मार्च को होने वाली सुनवाई में पेश की जानी है।
यह घटनाक्रम लुधियाना के गांवों में बढ़ते आवारा कुत्तों के खतरे और अधिकारियों की लापरवाही को उजागर करता है। अगर प्रशासनिक स्तर पर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो यह स्थिति और भी विनाशकारी रूप ले सकती है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन जाती है, और आशा है कि जल्द ही इस समस्या का हल निकाला जाएगा।