अमृतसर| सोमवार को गेट भगतांवाला स्थित श्री आत्मानंद आश्रम के विश्वनाथ मंदिर में लोहड़ी का त्यौहार भव्य तरीके से मनाया गया। इस विशेष अवसर पर स्वामी आत्मज्योति गिरि जी और स्वामी आत्म प्रकाशानंद गिरि जी ने श्रद्धालुओं और बच्चों के साथ मिलकर भग्गा जलाया। लोहड़ी का यह पर्व न केवल मस्ती और उत्साह से भरा रहा, बल्कि इसके साथ भक्तों को लोहड़ी का प्रसाद भी बांटा गया, जिससे सभी में खुशी का माहौल बना।
स्वामी आत्मज्योति गिरि जी और स्वामी आत्म प्रकाशानंद गिरि जी के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम ने भक्तों को एकजुट करने का कार्य किया। जलती हुई लोहड़ी के चारों ओर भक्तगण एकत्रित हुए और श्रद्धा के साथ अग्नि में अपनी ज्वेलरी एवं फसल संस्कृति की प्रतीक प्रतीकों को अर्पित किया। इसके बाद दोनों संतों ने लोहड़ी के महत्व और इस परंपरा के पीछे की धार्मिक भावना पर भी प्रकाश डाला।
संतों ने अपने व्याख्यान में बताया कि लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमें जिम्मेदारी और धर्म से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने उपस्थित जनों को आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धर्म के सिद्धांतों को अपनाएं और समाज की भलाई के लिए कार्य करें। उन्होंने इस पर्व के माध्यम से भाईचारे और सहिष्णुता की भावना को बढ़ावा দেও की महत्ता पर जोर दिया।
यह उत्सव केवल एक सांस्कृतिक घटना नहीं थी, बल्कि इसमें सभी को एकजुटता का अनुभव कराया गया। कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों और भक्तों ने संतों द्वारा दिए गए संदेश को ध्यानपूर्वक सुना और उसे अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस प्रकार, श्री आत्मानंद आश्रम के इस आयोजन ने लोहड़ी की परंपरा को और अधिक सशक्त बनाया और इस त्योहार के मायने को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
इस महोत्सव से जुड़े सभी लोग इस अनुभव से अभिभूत नजर आए और उन्होंने एक-दूसरे के साथ उल्लास के साथ समय बिताया। इस प्रकार, लोहड़ी का पर्व एक अनूठी सामाजिक और धार्मिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा, जिससे सभी भक्तगण खुशी-खुशी वापस लौटे। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को प्रबल किया, बल्कि सभी में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी किया।