खन्ना में वकीलों की हड़ताल ने फिर से एक बार गरमाापन पकड़ा है। फतेहगढ़ साहिब में नगर कौंसिल चुनाव के दौरान एक वकील पर हुए जानलेवा हमले के खिलाफ वकीलों ने आज पूरी तरह से हड़ताल का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में खन्ना के वकील विधायक गैरी बडिंग और उनके भाई का पुतला दहन कर अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं। इस मुद्दे पर खन्ना के सीनियर एडवोकेट जगजीत सिंह औजला ने टिप्पणी की कि पुलिस प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आईपीएस अधिकारियों की कार्यशैली शर्मनाक हो चुकी है और उनकी स्थिति सिपाही और हवलदार से भी बदतर हो गई है।
बार एसोसिएशन खन्ना के अध्यक्ष तेजप्रीत सिंह अटवाल ने बताया कि वकीलों का हड़ताल आंदोलन 23 दिसंबर से शुरू हुआ था। इसके बाद 25 से 31 दिसंबर के बीच अदालतों में छुट्टियाँ रही, लेकिन जैसे ही नया साल शुरू हुआ, वकीलों ने अपनी हड़ताल को फिर से जारी रखा। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक यह संघर्ष समाप्त नहीं होगा। इसके अलावा, उन्होंने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की योजना की भी जानकारी दी है। इससे पहले 9 जनवरी को भी प्रदेश में वकीलों की एक हड़ताल हुई थी, जिसके दौरान फतेहगढ़ साहिब में एसएसपी ऑफिस के बाहर धरना दिया गया था।
इस घटनाक्रम की बात करें तो एडवोकेट हसन सिंह, जो कि खन्ना, समराला और अमलोह बार एसोसिएशन के सदस्य हैं, उस दिन पोलिंग बूथ पर उपस्थित थे जब उनके ऊपर हमला किया गया। यह हमला उस समय हुआ जब विधायक का भाई अपने साथियों के साथ पोलिंग बूथ पर पहुंचा। इस दौरान, एडवोकेट हसन सिंह पर रिवाल्वर का बट सिर में मारते हुए तेज धार हथियार से हमला किया गया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उनकी मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) तैयार की गई। वकीलों ने इंसाफ की मांग को लेकर हड़ताल की योजना बनाई है, लेकिन फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने इस संदर्भ में कोई कार्रवाई करने से इंकार कर दिया।
उल्लेखनीय है कि वकीलों का असंतोष तब और बढ़ गया जब पुलिस ने शहीदी सभा में व्यस्त होने का बहाना बनाकर इस जानलेवा हमले की गंभीरता को नजरअंदाज किया। इस मुद्दे पर डीजीपी पंजाब को एक पत्र लिखा गया और एसएसपी से मुलाकात भी की गई, लेकिन एसएसपी ने प्रभावी कार्रवाई करने के लिए केवल दो-तीन दिन का समय मांगा था। खन्ना वकीलों का मानना है कि पुलिस राजनीतिक दबाव के कारण कोई ठोस कदम उठाने से हिचक रही है, जिससे न्याय की उम्मीदें क्षीण होती जा रही हैं।
इस प्रकार, खन्ना के वकीलों का संघर्ष टकराव की स्थिति में पहुंच गया है, जिसमें उनकी इंसाफ की मांग की सुनवाई के लिए उठाई जा रही आवाजें सशक्त बनती जा रही हैं। जब तक उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक यह आंदोलन और तेज होने की संभावना है।