ईश्वर की सेवा में लगने वाले सभी ऋण से मुक्त : ललित

ईश्वर की सेवा में लगने वाले सभी ऋण से मुक्त : ललित

-समय का बताया महत्व, इसे रोका, सुधारा व संग्रहित नहीं किया जा सकता

महाकुम्भ नगर, 11 फरवरी (हि.स.)। किसी भी व्यक्ति के जीवन में पाच प्रकार के कर्म ऋण होते हैं। इनको उतारने के लिए जीवन में कई उपाय करने होते हैं। लेकिन जो अपना जीवन ही ईश्वर की सेवा अर्थ समर्पित कर देता है, उनके सारे ऋण मुक्त हो जाते हैं। वर्तमान संगम का समय बहुत महत्वपूर्ण है। समय को न ही बनाया जा सकता है, न रोका जा सकता है और न ही भूतकाल में जाकर उसे सुधारा जा सकता है। उक्त बातें मेला क्षेत्र, सेक्टर-7 बजरंग दास मार्ग पर स्थित स्वर्णिम भारत ज्ञानकुम्भ मेले में ब्रह्माकुमारीज मुख्यालय माउण्ट आबू से आए संस्था के वरिष्ठ सदस्य सी.ए ब्रह्माकुमार ललित भाई ने कही। उन्होंने कहा कि स्वयं भगवान ने इस संगम युग पर पुण्य का खाता जमा करने व बढ़ाने के लिए यह बैंक खोला हुआ है। सेवा का अवसर मिलना अविनाशी भाग्य जमा करने की लॉटरी के समान है। इसके साथ ही अहमदाबाद नवरंगपुरा सेवा केंद्र की ब्रह्माकुमारी इशिता ने कहा की हम सभी अति भाग्यशाली हैं जो महाकुम्भ मेले में ईश्वरीय सेवा करने का महान सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इतनी लाखों आत्माओं को एक साथ ईश्वरीय संदेश प्राप्त होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। अमेरिका से आई ब्रह्माकुमारी वैशाली ने कहा कि अमेरिका से यहां आना मेरा परम सौभाग्य है । आप सब बहुत भाग्यवान हैं जो स्वयं भगवान ने आपको यह गोल्डन चांस दिया है। इस कुम्भ मेले में पूरे विश्व की निःस्वार्थ सेवा करने का, आप सभी परोक्ष और अपरोक्ष तरीके से विश्व परिवर्तन के कार्य में सहयोगी बन रहे हैं। मेले की संयोजिका ब्रह्माकुमारी मनोरमा ने कहा कि हम सभी का इस ज्ञान कुम्भ मेले का लक्ष्य यही है कि दुनिया भर से आए लोगों को मानसिक सुख शांति, खुशी और जीवन को तनाव मुक्त बनाने का सत्य मार्ग मिले। आत्मा और परमात्मा के सत्य स्वरूप को जानकर अपने जीवन को खुशहाल बनाएं। इसके बाद उपस्थित जनसभा ने मेले की संयोजक मनोरमा का उनके अथक सेवाओं के लिए दिल से आभार प्रकट किया।

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