हरियाणा और पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों की आज, 14 फरवरी को चंडीगढ़ में केंद्र सरकार के साथ पांचवी बार बातचीत होने जा रही है। इस वार्ता में किसानों की तरफ से 28 नेता शामिल होंगे। इस बैठक की अगुवाई संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के जगजीत डल्लेवाल और किसान मजदूर मोर्चा के सरवण पंधेर करेंगे। किसान अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। बता दें, जगजीत डल्लेवाल पिछले 81 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं और आज सुबह 11 बजे खनौरी बॉर्डर से चंडीगढ़ के लिए रवाना होंगे। केंद्र की तरफ से इस बैठक में कौन प्रतिनिधित्व करेगा, इसकी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है। यह बैठक चंडीगढ़ के सेक्टर 26 स्थित मगसीपा कार्यालय में शाम 5:30 बजे होगी।
किसानों का आंदोलन 13 फरवरी से शुरू हुआ था, जब उन्होंने दिल्ली कूच करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। तभी से ये किसान वहीं पर डटे हुए हैं। किसानों और केंद्र सरकार के बीच अब तक चार दौर की वार्ता हो चुकी हैं, लेकिन कोई समाधान निकल नहीं पाया है। पहले चार वार्ताओं में केंद्र की तरफ से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय उपस्थित थे।
किसानों और केंद्र सरकार के बीच हुई पहली बैठक 8 फरवरी को थी, जिसमें कुछ मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन किसान संगठन MSP की लीगल गारंटी की दिशा में अड़े रहे। इसके पश्चात 12 फरवरी को एक अन्य बैठक हुई, जिसमें MSP की कानूनी गारंटी पर मतभेद उत्पन्न हो गए थे। इसके फलस्वरूप किसान संगठन की गतिविधियां जारी रहीं, जिसमें उन्होंने दिल्ली कूच का प्रयास किया था, लेकिन हर बार पुलिस ने उन्हें रोक दिया। 15 फरवरी को भी एक बैठक हुई, जिसमें किसानों ने हरियाणा पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
केंद्र सरकार ने 18 फरवरी को एक नई योजना प्रस्तुत की, जिसमें धान, गेहूं, मसूर, उड़द, मक्की और कपास पर MSP देने का प्रावधान पेश किया गया, लेकिन किसानों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इस बीच, हरियाणा हाईकोर्ट ने किसान आंदोलन को लेकर आदेश दिया कि शंभू बॉर्डर खोला जाना चाहिए। हालांकि, हरियाणा सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
किसान नेता सरवण पंधेर ने चेतावनी दी है कि यदि आज की बैठक में कोई हल नहीं निकला, तो किसान 25 फरवरी को दिल्ली की ओर कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी सभी मांगें पूर्ण नहीं हो जातीं। बैठक की महत्वपूर्णता इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र सरकार किसानों की किस तरह से बातचीत को स्वीकार करना चाहती है। किसान इसे अपनी वैध अधिकारों की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं और इस काम को जारी रखने का संकल्प लेते हुए अपनी भावी रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं।