महाशिवरात्रि का पर्व इस वर्ष काशी में भव्य रूप से मनाया जाएगा, जहां काशी विश्वनाथ मंदिर में लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए, शहर के भीतर कार और बाइक को 3 किलोमीटर पहले रोक दिया गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है, जिससे हर श्रद्धालु को दर्शन के लिए कम से कम 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा। पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर बैरिकेडिंग की है ताकि व्यवस्था को बनाए रखा जा सके। वहीं, जब अखाड़ों के नागा साधु दर्शन करेंगे, तब आम श्रद्धालुओं के दर्शन कुछ समय के लिए रोक दिए जाएंगे।
दर्शन की प्रक्रिया के बारे में बात करें तो, 26 फरवरी की सुबह 3.30 बजे मंगला आरती के बाद मंदिर खुल जाएगा और श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे। महाशिवरात्रि पर चारों पहर की आरती में भी झांकी दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी की रात एक बजे तक बाबा श्रद्धालुओं को दर्शन देने का क्रम जारी रहेगा। मंदिर में प्रवेश और निकासी दोनों के लिए एक ही गेट का उपयोग किया जाएगा ताकि व्यवस्था और अधिक बेहतर हो सके।
दर्शन के लिए भीड़ की स्थिति को देखते हुए, सभी प्रमुख गेट पर 3 से 4 घंटे का समय लग सकता है। VIP दर्शन की सुविधा 25 से 27 फरवरी तक के लिए निलंबित कर दी गई है। बाबा विश्वनाथ का विवाहोत्सव 26 फरवरी की रात को मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा, जहां श्रृंगार पूजन और रिवाजों का पालन किया जाएगा। वहीं, मंदिर में प्रसाद चढ़ाने की अनुमति नहीं है, लेकिन श्रद्धालु जल, दूध, और फूल जैसे सामान कार्टन के माध्यम से चढ़ा सकते हैं।
वाराणसी में आ रहे श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग व्यवस्था भी काफी सटीक की गई है। बाहर के शहरों से आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं, जैसे प्रयागराज की ओर से आने वाले वाहनों को जगतपुर में पार्किंग दिखाने के लिए भेजा जाएगा। हर पार्किंग स्थल से पुलिस बैरियर तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा या ऑटो की सुविधा उपलब्ध होगी, और इसके बाद श्रद्धालुओं को 2.5 से 3 किलोमीटर पैदल चलने की आवश्यकता होगी।
रेलवे और एयर यात्रा से आने वाले भक्तों के लिए भी सुविधाएँ तैयार की गई हैं। बाबतपुर एयरपोर्ट से श्रद्धालु बेनियाबाग तिराहे तक पहुँच सकते हैं, जहाँ से उन्हें पुलिस बैरियर तक पहुँचने के लिए पैदल चलना होगा। वाराणसी के चार रेलवे स्टेशनों से विभिन्न शहरों के लिए ट्रेनें चल रही हैं और विशेष ट्रेनें भी शुरू की गई हैं।
साथ ही, गंगा स्नान करने के लिए श्रद्धालु गोदौलिया से 2 किलोमीटर दूर दशाश्वमेध घाट जा सकते हैं। वह वहाँ असि घाट आदि पर भी स्नान कर सकते हैं। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर वाराणसी में विशेष रूप से निशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है, जहां श्रद्धालुओं को अन्न क्षेत्र में पुर्वाह्न और अपराह्न निशुल्क भोजन दिया जाएगा। इस तरह, काशी में महाशिवरात्रि का पर्व भक्तों के लिए एक अद्वितीय अनुभव बनने जा रहा है।